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Chaitra Navratri 2026 : कब है महाअष्टमी और राम नवमी? जानिए कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और सही तारीख

Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्र के दौरान महाअष्टमी और राम नवमी कब मनाई जाएगी. इन दोनों दिनों पर कन्या पूजन, हवन और विशेष पूजा का महत्व होता है. शुभ मुहूर्त में किए गए धार्मिक कार्य जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं.

By: Ranjana Sharma | Published: March 25, 2026 7:25:57 AM IST



Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्र के पावन दिनों में महाअष्टमी और राम नवमी का विशेष महत्व होता है. चैत्र नवरात्र के दौरान भक्त पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करते हैं और इन तिथियों का बेसब्री से इंतजार करते हैं. साल 2026 में इन दोनों पर्वों की सही तिथि और शुभ मुहूर्त क्या हैं, आइए जानते हैं.

कब है महाअष्टमी और राम नवमी?

द्रिक पंचांग के अनुसार, महाअष्टमी 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी. अष्टमी तिथि 25 मार्च दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 26 मार्च सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक रहेगी. वहीं राम नवमी 27 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी. नवमी तिथि 26 मार्च सुबह 11 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर 27 मार्च सुबह 10 बजकर 06 मिनट तक रहेगी.

कन्या पूजन का महत्व और शुभ मुहूर्त

अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. इस दिन 2 से 10 साल की कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है.

कन्या पूजन के लिए शुभ मुहूर्त

  • सुबह 6:17 बजे से 7:51 बजे तक
  • सुबह 10:56 बजे से दोपहर 3:32 बजे तक
  • राम नवमी पर बन रहे शुभ योग

राम नवमी के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जो पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं.

  • सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 6:17 बजे से दोपहर 3:24 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 12:51 बजे तक
  • लाभ उन्नति मुहूर्त: सुबह 7:50 बजे से 9:22 बजे तक
  • रवि योग: पूरे दिन

क्या करें? 

  • अष्टमी के दिन कन्या पूजन जरूर करें और उनका आशीर्वाद लें.
  • अष्टमी और नवमी के बीच संधि काल में दीपक जलाकर मां चामुंडा का ध्यान करें.
  • राम नवमी के दिन घर में हवन करना शुभ माना जाता है.

क्या न करें?

  • इन दिनों किसी से झगड़ा या अपमान न करें.
  • तामसिक भोजन जैसे मांस और शराब से दूर रहें.
  • देवी दुर्गा को तुलसी अर्पित न करें, जबकि भगवान राम को तुलसी चढ़ाना शुभ है.
  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करें, देर तक सोना अशुभ माना जाता है.

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