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Chaitra Navratri 2026: अष्टमी या नवमी, इस नवरात्रि कब करनी चाहिए कन्या पूजन? जानें सही तारीख, विधि और मुहूर्त

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 में कन्या पूजन के लिए महाअष्टमी (26 मार्च) और नवमी (27 मार्च) दोनों ही उत्तम तिथियां हैं.

By: Preeti Rajput | Published: March 21, 2026 10:13:39 AM IST



Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप माना जाता है. इसलिए नवरात्रि में कन्या पूजन किया जाता है. माना जाता है कंजक पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और सभी भक्तों की मनोकामना पूरी तरती हैं. हिंदू वर्ष में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. जिसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि विशेष रुप से मनाई जाती है. नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि पर्व में मां दुर्गा के नो रूपों के पूजा की जाती है. कन्या पूजन नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को किया जाता है. चैत्र नवरात्रि 2026 में कन्या पूजन के लिए महाअष्टमी (26 मार्च) और नवमी (27 मार्च) दोनों ही उत्तम तिथियां हैं.

कन्या पूजा की तारीख

  • दुर्गा अष्टमी : 26 मार्च, गुरुवार
  • महानमी : 27 मार्च, शुक्रवार

पंचांग के अनुसार, दुर्गा अष्टमी चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. इस बार चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 25 मार्च बुधवार को दोपहर से शुरु हो रही है. 1:50 बजे से लेकर 26 मार्च गुरुवार सुबह 11:48 तक अष्टमी तिथि रहने वाली है. इसलिए दुर्गा अष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी और इसी दिन कन्या पूजन किया जा सकता है. 

चैत्र शुक्ल नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे से शुरु होने वाली है. जो 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक है. उदयातिथि के मुताबिक, महानवमी 27 मार्च को है. जो महानवमी को कन्या पूजा करते हैं, वे 27 मार्च को कन्या पूजा कर सकते हैं. 

दुर्गा अष्टमी के शुभ मुहूर्त 

  • शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 06:18 – सुबह 07:50 
  • चर-सामान्य मुहूर्त : सुबह 10:55 – दोपहर 12:27 
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त : दोपहर 12:27 – दोपहर 01:59 

नवमी के शुभ मुहूर्त

  • सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 06:17- दोपहर 03:24
  • अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:02 – दोपहर 12:51 
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 07:50 – सुबह 09:22 

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कन्या पूजन के जरूरी नियम

  • 2 साल से 10 साल तक की बालिका.
  • संख्या 2 से लेकर 9 तक होनी चाहिए.
  • 1 बालक को भी रखना चाहिए.
  • उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख होना जरूरी.
  • पूजन करें और फिर उनको खीर, पूड़ी, हलवा, चना, मिठाई थाली में परोसें.
  • उपहार और दक्षिणा देकर विदा करें.
  • अगले वर्ष आने का निवेदन करना चाहिए.

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