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ऋतिक रोशन का बड़ा दावा, आई एक्सरसाइज से घटाया चश्मा के नंबर; जानें क्यों डॉक्टर्स ने दी चेतावनी?

Eye Exercises and Refractive Error: डॉक्टर्स के मुताबिक, आंखों की एक्सरसाइज से फोकसिंग में सुधार हो सकता है, लेकिन परमानेंट रिफ्रैक्टिव एरर को ठीक नहीं किया जा सकता है. चश्मे का नंबर आंख की संरचना के मुताबिक होता है. जैसे किसी एक्सरसाइज से बदला नहीं जा सकता है.

By: Preeti Rajput | Published: February 19, 2026 11:44:24 AM IST



Eye Exercises or Medical Myth: बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रोशन ने सोशल मीडिया एक हैरान कर देने वाला दावा किया है. एक्टर ने दावा किया कि ‘आई वर्कआउट’ यानी आंखों की एक्सरसाइज के जरिए चश्मे का नंबर कम किया जा सकता है. ऋतिक का यह इंस्टा पोस्ट सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है. एक्टर ने बताया कि 42 साल की उम्र में एक डॉक्टर ने कहा था कि चश्मे का नंबर परमानेंट होता है. आंख ऐसी मांसपेशी नहीं है, जिसे ट्रेन करके बदला जा सकता है. उन्होंने इस बात को एक चुनौती की तरह ले लिया. वॉशिंगटन डीसी जाकर ऑप्टोमेट्रिस्ट डॉ. ब्राइस एपलबॉम के साथ 5 दिन का विजन ट्रेनिंग प्रोग्राम में वह शामिल हुए. रोजाना 4 घंटों की ट्रेनिंग के बाद उनके चश्मे का नंबर आधा रह गया है. उन्हें नया प्रिस्क्रिप्शन लेना पड़ेगा. ऋतिक के इस दावे पर खूब बहस छिड़ गई है. 

ऋतिक रोशन का बड़ा दावा 

डॉक्टर्स का मुताबिक, 40 वर्ष की उम्र के बाद कई लोगों को प्रेस्बायोपिया नाम की समस्या हो सकती है. यह उम्र से जुड़ी स्थिति है, जिसमें पास की चीजें पढ़ने में कठिनाई होती है. क्योंकि आंख की फोकस करने की क्षमता कम होने लगती है. कुछ मामलों में फोकसिंग और आंखों के कोऑर्डिनेशन से जुड़ी एक्सरसाइज से टेंपररी सुधार महसूस हो सकता है. संभव है कि अभिनेता को इस तरह की फोकसिंग समस्या में लाभ मिलता है. लेकिन स्थायी रिफ्रैक्टिव एरर में वास्तविक कमी संभव नहीं है. चश्मे का नंबर इस एक्सरसाइज से कम करने की बात में बिल्कुल सच नहीं है.

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ऐसा संभव ही नहीं 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादातक लोग मायोपिया, प्रेसबायोपिया या एस्टिग्मैटिज्म जैसी समस्याओं के कारण चश्मा पहनते हैं. यह आंख की बनावट जैसे आई बल की लंबाई या या कॉर्निया की वक्रता से जुड़ी होती है. आंखों की मांसपेशियों को मजबूत करने से इन संरचनात्मक बदलावों को ठीक नहीं किया जा सकता है. स्थायी रूप से चश्मे का नंबर कम होना वैज्ञानिक रूप से संभव हीं है. विजन ट्रेनिंग प्रोग्राम मुख्य रूप से आंख और दिमाग के बीच के समन्वय को बेहतर करने पर केंद्रित होता है. यह जानना बेहद जरूरी है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने या नजदीक से कम करने से आंखों की सिलियरी मसल पर दबाव पड़ने लगता है. जिससे नजर कमजोर लग सकती है. इसे कभी-कभी स्यूडो मायोपिक शिफ्ट बोला जाता है. यह तनाव को कम करता है और फोकसिंग एक्सरसाइज करते हैं, तो व्यक्ति को लगने लगता है कि नजर में सुधार आ गया है, लेकिन ऐसा नहीं होता बल्कि अस्थायी राहत होती है.  

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