Suresh Kalmadi Career: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार को 81 साल की उम्र में निधन हो गया. यह जानकारी कलमाड़ी के ऑफिस से जारी एक ऑफिशियल बयान में दी गई. इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के पूर्व अधिकारी कलमाड़ी पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में इलाज करवा रहे थे. लंबी बीमारी के बाद उन्होंने सुबह करीब 3:30 बजे आखिरी सांस ली.
ऐसे विवादों में घिरे सुरेश
कॉमनवेल्थ गेम्स 2020 के आयोजन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सुरेश का नाम भी शामिल था, दरअसल, कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के कार्यकाल के दौरान यह मामला बहुत ज़्यादा विवादों में आ गया था. कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले को लेकर कई आरोप और जवाबी आरोप लगाए गए थे. CBI ने आरोप लगाया था कि एक स्विस कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट देने से लगभग 90 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. इसके बाद कलमाड़ी को 24 अप्रैल, 2022 को गिरफ्तार किया गया था. बाद में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी.
शरद पवार के ख़ास थे कलमाड़ी
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राजनीति में सुरेश कलमाड़ी को शरद पवार का नज़दीकी माना जाता है, यहाँ तक कि एक विश्लेषक ने उन्हें कलमाड़ी का गॉड-फॉदर तक बताया है. कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेता तो ये भी कहते हैं कि कलमाड़ी ने पवार को प्रधानमंत्री बनाने के लिए भी पूरा ज़ोर लगाया था.
शुरुआती जीवन और पूना कॉफ़ी हाउस
सुरेश कलमाड़ी के पिता डॉक्टर शामराव पुणे के जाने-माने समाजसेवी थे. उन्होंने कन्नड़ संघ और पुणे में कन्नड़ स्कूल की शुरुआत की थी. कलमाड़ी परिवार मूल रूप से कर्नाटक से था. वायुसेना से जुड़ने के बाद सुरेश कलमाड़ी ने पुणे के डेकन जिमखाना इलाके में स्थित पूना कॉफ़ी हाउस खरीदा. उस समय यह एक छोटा सा रेस्तरां था, लेकिन कलमाड़ी ने इसे नया रूप दिया और इसे मशहूर बना दिया. सत्तर के दशक में पूना कॉफ़ी हाउस के जरिए उन्होंने कारोबार की शुरुआत की और यहीं से उनकी पहचान एक कुशल मैनेजर और नेटवर्क बनाने वाले व्यक्ति के रूप में हुई.
राजनीति में एंट्री और शरद पवार से नज़दीकी
इन्हीं दिनों सुरेश कलमाड़ी की मुलाकात जायंट्स इंटरनेशनल के नाना चुदासामा और बाद में शरद पवार से हुई. शरद पवार को कलमाड़ी में एक ऐसा नेता दिखा जो शहरी सोच वाला, उद्योगपतियों से जुड़ा और अच्छा संपर्क रखने वाला था. पवार की मदद से कलमाड़ी 1977 में पुणे युवा कांग्रेस और फिर महाराष्ट्र युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने. आगे चलकर जब शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाई, तो कलमाड़ी भी उनके साथ चले गए और युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. 1982 में वे पहली बार राज्यसभा पहुंचे. बाद में कांग्रेस में लौटकर 1991 में लोकसभा सांसद बने और नरसिम्हा राव सरकार में रेलवे राज्य मंत्री बने. वे ऐसे इकलौते राज्य मंत्री रहे जिन्होंने संसद में रेल बजट पेश किया.