Republic Day 2026 History: गणतंत्र दिवस के जश्न को शुरु होने में महज कुछ ही घंटे बाकी है. भारत ने सुरक्षा से लेकर परेड तक हर पहलू की तैयारी पूरी कर ली है. हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. इस साल भारत 76वां रिपब्लिक डे मनाने जा रहा है. हर साल यह दिन देशभक्ति के प्रदर्शनों से भरा होने के साथ उस दिन की याद दिलाता है जब भारत ने अपना संविधान लागू किया और उसे औपचारिक रुप से अपनाया. जिसके जरिए शासन की ताकत लोगों के हाथों में आ गई. संविधान ने आम नागरिकों को कई अधिकार दिए. देश कैसे चलाया जाएगा, इसकी पूरी व्यख्या संविधान के जरिए लागू की गई. यह दिन नागरिकों को देश के अतीत और संविधान में दिए गए आदर्शों को समझने के लिए एक बार फिर से जागरुक करता है. संविधान भारत की मजबूत नींव है, जिसके जरिए देश शांति और नियमों के साथ चलता है.
रिपब्लिक डे का महत्व
रिपब्लिक डे 1950 में भारतीय संविधान के लागू होने को कहा जाता है. जिसने उस कॉलोनियल जमाने के कानूनों को बदला और भारत को एक गणतांत्रिक देश बनाया. इसके जरिए भारत ने राजनीतिक, कानूनी और नैतिक रुप से ब्रिटिश शासन को दूर कर दिया. यह संविधान भारतियों द्वारा भारतियों के लिए बनाया गया था. इस संविधान में हर नागरिक को बुनियादी अधिकारों की गारंटी दी गई. साथ ही कानून में बराबरी और आजादी की रक्षा का भी आश्वासन दिया गया. इसलिए कहते हैं रिपब्लिक डे एक ऐसे देश के जन्म का प्रतीक है. जो कानून से चलता है. जिसमें न्याय, आजादी और बराबरी का अधिकार है.
क्यों मनाते हैं गणतंत्र दिवस?
रिपब्लिक डे उस पल का जश्न है जब भारत ने अधिकारिक तौर पर डेमोक्रेसी को जीने के तरीके को अपनाया. एक ऐसे सिस्टम जहां लोग अपना लीडर खुद चुनते हैं. वह लीडर हमेशा जनता को जवाबदेह होता है. संविधान और रिपब्लिक देश यह पक्का करता है कि हर नागरिक की आवाज को महत्व दिया जाएगा, फिर चाहे वह किसी भी धर्म या जाती का हो. गणतंत्र दिवस का जश्न केवल इलेक्शन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एक्टिव सिटिज़नशिप, अधिकारों और कॉन्स्टिट्यूशनल प्रिंसिपल्स को भी सम्मान देती है. इस जश्न को इन सभी अधिकारों को सेलिब्रेट करने के लिए मनाया जाता है.
गणतंत्र दिवस का इतिहास
गणतंत्र दिवस की जड़ें भारत के आजादी के संघर्ष से जुड़ा है. 1947 में आजादी के बाद भारत गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 के तहत तक तक काम करता रहा, जब तक परमानेंट संविधान तैयार नहीं हो गया. डॉ. बी.आर अंबेडकर के नेतृत्व में लगभग तीन साल में तैयार किया गया है. संविधान 26 नवंबर 1949 को फाइनल हुआ था. इसे बनने में 1 साल 11 महीने 18 दिन लगे थे. हालांकि, इसे 26 जनवरी को लागू करने का फैसला लिया गया था. इस तारीख का ऐतिहासिक मतलब और गहरा हो गया.
26 जनवरी को क्यों मनाया जाता है गणतंत्र दिवस?
भारत के आजादी के आंदोलन में 26 जनवरी का खास महत्व होता है. 26 जनवरी, 1930 को इंडियन नेशनल कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार को हमेशा के लिए खारिज करने के साथ पूर्ण स्वराज का ऐलान किया था. यह ऐलान कॉलोनियल पॉलिसी नाराजगी के बाद किया गया था. जिसमें साइमन कमीशन से भारतीयों को बाहर रखना और भारत की सेल्फ रूल की मांग को खारिज करना था. 1950 में इस तारीख को चुनना आजादी के इरादे को उसकी कानूनी पूर्ति से जोड़ता है.
26 जनवरी, 1950 को क्या हुआ था?
26 जनवरी, 1950 भारत के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आया है. संविधान लागू हुआ, जिससे भारत का ब्रिटिश डोमिनियन वाला स्टेटस ऑफिशियली खत्म हो गया. गवर्नर जनरल का पद खत्म कर दिया गया. डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश के पहले प्रेसिडेंट के तौर पर शपथ ली और हेड ऑफ स्टेट बने. उसी दिन भारत ने अपने पहली परेड देखी, जिसमें देश की कल्चरल डायवर्सिटी और मिलिट्री ताकत पूरे विश्व को देखने मिली.