PM Kisan e-KYC: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की एक जरूरी पहल है. इसका मकसद छोटे किसानों को खेती से जुड़े खर्चों और घरेलू जरूरतों में आर्थिक सहायता देना है. ये योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के माध्यम से पूरे देश में लागू की जा रही है. इस योजना के तहत किसानों को हर साल कुल 6,000 रुपये दिए जाते हैं. ये राशि एक साथ न देकर तीन बराबर किस्तों में दी जाती है. हर किस्त 2,000 रुपये की होती है. पहली किस्त अप्रैल से जुलाई के बीच, दूसरी अगस्त से नवंबर के बीच और तीसरी दिसंबर से मार्च के बीच किसानों के बैंक खाते में भेजी जाती है. पिछले सालों के पैटर्न को देखते हुए अगली, यानी 22वीं किस्त फरवरी में आने की संभावना है, लेकिन इसको लेकर सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
आधार और ई-केवाईसी क्यों जरूरी है
सरकार ने ये साफ कर दिया है कि योजना का लाभ पाने के लिए आधार कार्ड और ई-केवाईसी जरूरी है. बिना ई-केवाईसी पूरी किए किसानों को किस्त नहीं मिलेगी. इसी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अब ओटीपी के जरिए ई-केवाईसी की सुविधा शुरू की गई है.
ओटीपी से ई-केवाईसी कैसे करें
ओटीपी आधारित ई-केवाईसी करने के लिए किसान के आधार से जुड़ा हुआ मोबाइल नंबर एक्टिव होना चाहिए. प्रक्रिया इस प्रकार है-
सबसे पहले किसान को पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा.
वेबसाइट के होम पेज पर ऊपर की ओर ई-केवाईसी का ऑप्शन दिखाई देगा.
इस ऑप्शन पर क्लिक करके अपना आधार नंबर दर्ज करें.
आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा.
ओटीपी डालते ही ई-केवाईसी पूरी हो जाएगी.
पीएम किसान योजना के लिए पात्रता
इस योजना का लाभ वही किसान ले सकते हैं जो भारत के नागरिक हों.
किसान के नाम पर खेती योग्य जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होनी चाहिए.
आधार कार्ड का बैंक खाते से जुड़ा होना जरूरी है.
संस्थागत भूमि धारक इस योजना के पात्र नहीं होते.
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के किसान ही इस योजना में शामिल किए जाते हैं. सरकारी कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मचारी जिन्हें 10,000 रुपये या उससे अधिक पेंशन मिलती है और पेशेवर करदाता इस योजना का लाभ नहीं ले सकते.
सभी पात्र किसानों के लिए ई-केवाईसी पूरा करना जरूरी है.
रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी डॉक्युमेंट
पीएम किसान योजना में आवेदन के लिए कुछ बुनियादी डॉक्युमेंट की जरूरत होती है. इनमें नागरिकता का प्रमाण, आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और जमीन के स्वामित्व से जुड़े कागजात शामिल हैं.
ये योजना किसानों को समय पर आर्थिक सहायता देकर उनकी खेती और जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक अहम कदम है.