NIA on Narco-Terror Case: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 7 अक्टूबर को 2020 के अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेरर नेटवर्क मामले में आठ और आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है. यह मामला पाकिस्तान से समुद्री रास्ते से गुजरात के रास्ते भारत में ड्रग्स की तस्करी से जुड़ा है. एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. बता दें कि ड्रग्स का उद्देश्य लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) आतंकी संगठन को वित्तपोषित करना था.
मुख्य आरोपी और उनकी भूमिकाएं
इस मामले में ड्रग्स का संबंध पाकिस्तान से समुद्र के रास्ते गुजरात में 500 किलोग्राम हेरोइन की तस्करी और फिर उसे पंजाब ले जाने से है. ड्रग्स की बिक्री से होने वाले मुनाफे का इस्तेमाल प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को वित्तपोषित करने के लिए किया गया था. यह साज़िश गुजरात, दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ सहित भारतीय राज्यों में फैली हुई थी और इटली, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान, ईरान और थाईलैंड जैसे देशों में भी इसकी अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति थी.
आठ नए आरोपियों पर लगाए गए आरोप
सिमरनजीत सिंह संधू (इटली): मुख्य मास्टरमाइंड के रूप में पहचाना गया, जो अवैध मादक पदार्थों के परिवहन, भंडारण, प्रसंस्करण और आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए ज़िम्मेदार था.
तनवीर सिंह बेदी (ऑस्ट्रेलिया): भारत में लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाला चैनलों के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी और आय के हस्तांतरण में सक्रिय रूप से शामिल था.
अंकुश कपूर (भारत): भारत में एक प्रमुख मास्टरमाइंड, जिसने पंजाब में जमीनी गतिविधियों का प्रबंधन किया, रसद, भंडारण, स्थानीय वितरण का समन्वय किया और सह-आरोपियों को धन मुहैया कराया.
तारिक उर्फ भाईजान (पाकिस्तानी नागरिक): पाकिस्तान से समुद्री मार्ग से हेरोइन की तस्करी के समन्वय, पंजाब में इसके परिवहन, वितरण की निगरानी और लश्कर-ए-तैयबा के गुर्गों तक आय पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
गगनदीप सिंह अरोड़ा: एक हवाला ऑपरेटर, जो वर्तमान में फरार है, पर बड़े पैमाने पर धन शोधन और आतंकवादी गुर्गों को अवैध धन हस्तांतरण में मदद करने का आरोप है.
तमन्ना गुप्ता, सुखबीर सिंह उर्फ हैप्पी और अनवर मसीह: आतंकवादी वित्तपोषण की साजिश में उनकी जानबूझकर की गई भूमिका के लिए आरोपित.
NIA की विशेष अदालत में आरोपपत्र दायर
एनडीपीएस अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूए(पी) अधिनियम) की विभिन्न धाराओं के तहत अहमदाबाद स्थित एनआईए की विशेष अदालत में व्यापक डिजिटल, तकनीकी और दस्तावेज़ी साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र दायर किया गया. एनआईए भगोड़ों का पता लगाने और सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए है, जिसका ध्यान मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद के बीच संबंधों को खत्म करने पर केंद्रित है.
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