Indore Water Crisis: मध्य प्रदेश का इंदौर शहर अपनी सफ़ाई के लिए काफी मशहूर था, लेकिन अब इसके पानी को लेकर हजारों सवाल उठ रहे हैं. इंदौर में दूषित पानी की वजह से डायरिया फैलने से एक बड़ी महामारी फैल गई है. अधिकारियों का कहना है कि, अब तक 398 मरीज़ों को आंतों के इन्फेक्शन की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इनमें से 256 ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं, जबकि 142 अभी भी अस्पताल में हैं. हैरान कर देने वाली बात ये है कि इनमें से 11 मरीज़ ICU में हैं. रविवार को अधिकारियों ने जानकारी दी है कि स्थिति अब कंट्रोल में है, लेकिन निगरानी जारी है. सबसे साफ़ शहर माने जाने वाले शहर में दूषित पानी का मामला, साथ ही वोटरों और नेताओं के बयानों और आरोपों ने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में डाल दिया है.
सामने आए नए मामले
जानकारी के मुताबिक रविवार को, स्वास्थ्य टीमों ने डायरिया के प्रकोप के केंद्र माने जाने वाले भागीरथपुरा इलाके में 2,354 घरों में 9,416 लोगों का सर्वे किया. सर्वे के दौरान, डायरिया के 20 नए मामले सामने आए हैं, और 429 मौजूदा मरीजों का फॉलो-अप किया गया. इस इलाके में अब तक दूषित पानी पीने से छह लोगों की मौत हो चुकी है.
जांच में जुटी टीमें
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि कोलकाता के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स (NIRBI) की एक टीम इंदौर पहुंची है. यह संस्थान ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) से जुड़ा हुआ है. उन्होंने बताया कि NIRBI के विशेषज्ञ स्वास्थ्य विभाग को इन्फेक्शन को पूरी तरह से रोकने और इसके कारणों की गहन जांच करने में तकनीकी सहायता दे रहे हैं.
इंदौर के पानी को किसने दूषित किया?
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुराने पाइपलाइन सिस्टम को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया था। पीने के पानी की लाइन सीवेज लाइन के नीचे बिछाई गई थी। नियमों के अनुसार, पीने के पानी की लाइनें और सीवेज पाइप सड़क के दोनों तरफ बिछाए जाने चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिनों से उनके घरों में आने वाले पानी में अजीब गंध और रंग था। इस पानी का इस्तेमाल करने के बाद लोगों को उल्टी और दस्त की समस्या ज़्यादा होने लगी, और उनकी सेहत तेज़ी से खराब हो गई। अधिकारियों को शक है कि पाइपलाइन की गलत इंस्टॉलेशन की वजह से पीने के पानी की लाइन सीवेज से दूषित हो गई, जिससे यह बीमारी फैली।
पुलिस चौकी से सामने आई हकीकत
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पानी की पाइपलाइन में लीकेज मिला। लीकेज के ठीक ऊपर एक टॉयलेट बनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस लीकेज की वजह से इलाके में पानी की सप्लाई दूषित हो गई।
बंगलुरु में भी बरपा कहर
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से 15 लोगों की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि देश के दो और बड़े शहरों से चिंताजनक खबरें आने लगीं। अब गुजरात की राजधानी गांधीनगर और IT सिटी बेंगलुरु में भी दूषित पानी कहर बरपा रहा है। इंदौर में हुई मौतों के बाद केंद्र सरकार की जांच में पता चला कि वहां पानी का स्टैंडर्ड बहुत खराब था। इंदौर से लिए गए पानी के सैंपल में से सिर्फ़ 33% ही पीने लायक पाए गए थे। अब यही लापरवाही गांधीनगर और बेंगलुरु में जानलेवा साबित हो रही है, जहां सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए हैं। बेंगलुरु के लिंगराजपुरम इलाके में भी हालात इंदौर जैसे ही हो रहे हैं। पीने के पानी की सप्लाई में सीवेज का पानी मिल रहा है। यह समस्या पिछले 2-3 महीनों से बनी हुई है।
गुजरात में भी इंदौर जैसी त्रासदी
गुजरात के गांधीनगर में पिछले पांच दिनों में हालात और खराब हो गए हैं। दूषित पीने के पानी की वजह से टाइफाइड के 100 से ज़्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं। मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि उनका इलाज सिविल अस्पताल में किया जा रहा है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में तुरंत हेल्थ सर्वे शुरू किया है। जांच में पता चला कि इन इलाकों में पीने का पानी दूषित था, जिससे लोग बीमार पड़ रहे थे।