Lalu Yadav Plea Rejected: दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में लालू प्रसाद यादव की याचिका खारिज कर दी. न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने स्पष्ट कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे निरस्त किया जाता है. यादव ने सीबीआई की प्राथमिकी (FIR), 2022-24 के आरोपपत्रों और निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को रद्द करने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया.
क्या है ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामला?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप-डी की नौकरियां उन लोगों को दी गईं, जिन्होंने यादव के परिवार या सहयोगियों के नाम पर जमीन ट्रांसफर या गिफ्ट की. इसे कथित तौर पर भ्रष्टाचार का मामला माना गया है.
याचिका में क्या दलील दी गई
लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की ओर से कहा गया था कि पूरी जांच प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध नहीं है. उनका तर्क था कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17ए के तहत पूर्व मंजूरी नहीं ली, जो आवश्यक थी. इसी आधार पर उन्होंने FIR और आरोपपत्रों को रद्द करने की मांग की थी. हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना.
अप्रयुक्त दस्तावेजों पर अदालत की सख्ती
अदालत ने उन याचिकाओं को भी खारिज कर दिया, जिनमें जांच एजेंसी द्वारा जब्त लेकिन आरोपपत्र में इस्तेमाल न किए गए दस्तावेज (अप्रयुक्त दस्तावेज) मांगे गए थे. कोर्ट ने कहा कि इस तरह सभी दस्तावेज एक साथ देना ‘बैलगाड़ी को घोड़े के आगे रखने’ जैसा होगा और इससे न्यायिक प्रक्रिया अव्यवस्थित हो सकती है.
अन्य आरोपियों को भी राहत नहीं
इस मामले में अन्य आरोपियों—जैसे यादव के निजी सचिव आर.के. महाजन और पूर्व रेलवे अधिकारी महीप कपूर—की याचिकाएं भी खारिज कर दी गईं. सीबीआई ने 18 मई 2022 को इस केस में यादव, उनकी पत्नी, बेटियों और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. फिलहाल सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं और मामले की विस्तृत आदेश प्रति का इंतजार किया जा रहा है.