Remarriage trend: भारत में शादी को लेकर पारंपरिक सोच तेजी से बदल रही है. जहां कभी कम उम्र में शादी करना सामान्य माना जाता था, वहीं अब युवा पहले करियर, आर्थिक स्थिरता और मानसिक तैयारी को प्राथमिकता दे रहे हैं. यही वजह है कि शादी की औसत उम्र बढ़ रही है और समाज में दूसरी शादी को लेकर भी स्वीकार्यता पहले से ज्यादा हो गई है.
29 साल के बाद शादी के बारे में सोच रहे युवा
मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म जीवनसाथी की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दशक में भारतीयों की शादी की औसत उम्र बढ़ गई है. करीब दस साल पहले जहां युवाओं की औसत शादी की उम्र 27 साल थी, वहीं अब यह बढ़कर 29 साल हो गई है. रिपोर्ट बताती है कि अब आधे से ज्यादा सिंगल्स 29 साल की उम्र के आसपास अपने लिए जीवनसाथी की तलाश शुरू करते हैं. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह करियर बनाना, आर्थिक रूप से मजबूत होना और मानसिक रूप से शादी के लिए तैयार होना है. पहले जहां 18–20 साल की उम्र के बाद परिवार शादी की बात शुरू कर देते थे, वहीं अब युवा खुद अपने फैसले लेने लगे हैं और जल्दबाजी में शादी करने से बच रहे हैं.
दूसरी शादी को लेकर बदली सोच
रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दूसरी शादी यानी रीमैरेज को लेकर भी समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है. आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में जहां सिर्फ 11 प्रतिशत लोग दूसरी शादी की तलाश कर रहे थे, वहीं 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 16 प्रतिशत हो गया है. यानी रीमैरेज के मामलों में करीब 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पहले तलाक या शादी टूटना समाज में बड़ी सामाजिक बाधा माना जाता था, लेकिन अब लोगों की सोच बदल रही है और दूसरी शादी को सामान्य रूप से स्वीकार किया जा रहा है.
तलाकशुदा प्रोफाइल में भी बढ़ी दिलचस्पी
रिपोर्ट के अनुसार, तलाकशुदा लोगों के प्रोफाइल में रुचि दिखाने वालों में करीब 15 प्रतिशत ऐसे लोग हैं, जिन्होंने कभी शादी नहीं की है. यह आंकड़ा बताता है कि अब युवा रिश्तों को लेकर अधिक व्यावहारिक सोच रखते हैं और जीवनसाथी चुनते समय केवल वैवाहिक स्थिति को ही निर्णायक मानदंड नहीं मानते.
जाति से ज्यादा अहमियत ‘कम्पेटिबिलिटी’ को
शादी को लेकर बदलती सोच का एक बड़ा संकेत यह भी है कि अब जाति की अहमियत कम होती जा रही है. 2016 में जहां करीब 91 प्रतिशत लोग शादी के लिए जाति को जरूरी मानते थे, वहीं 2025 तक यह संख्या घटकर 54 प्रतिशत रह गई है. मेट्रो शहरों में तो यह आंकड़ा और भी कम होकर करीब 49 प्रतिशत रह गया है. अब करीब 90 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उनके लिए सही स्वभाव, आपसी समझ और कम्पेटिबिलिटी उम्र या कमाई से ज्यादा महत्वपूर्ण है.
युवा खुद बना रहे मैट्रिमोनियल प्रोफाइल
रिपोर्ट के मुताबिक, अब अधिकतर युवा अपनी मैट्रिमोनियल प्रोफाइल खुद बनाते और संभालते हैं. वर्तमान में करीब 77 प्रतिशत लोग अपनी प्रोफाइल खुद मैनेज करते हैं, जबकि पहले यह आंकड़ा 67 प्रतिशत था. परिवार द्वारा मैनेज किए जाने वाले प्रोफाइल घटकर अब करीब 23 प्रतिशत रह गए हैं. हालांकि इसके बावजूद 69 प्रतिशत लोगों का मानना है कि माता-पिता की भागीदारी से शादी की प्रक्रिया आसान हो जाती है.