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Cancer Risk: नई स्टडी ने किया अलर्ट! अकेलापन और कैंसर के बीच मिला डराने वाला लिंक; यहां समझें कनेक्शन

Loneliness health effects: इस रिसर्च ने यह भी दिखाया कि जिन लोगों का सामाजिक संपर्क कम होता है, उनमें कैंसर होने की संभावना दूसरों की तुलना में अधिक हो सकती है.

Published by Shubahm Srivastava

Social Isolation Cancer Risk: नई रिसर्च से पता चला है कि सोशल आइसोलेशन यानी सामाजिक संपर्क की कमी सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य को ही नहीं बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है. खासतौर पर महिलाओं में यह स्थिति कैंसर के बढ़ते खतरे से जुड़ी हुई पाई गई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अकेलापन और लोगों से दूरी बनाकर रहने की आदत लंबे समय में शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है. इस रिसर्च ने यह भी दिखाया कि जिन लोगों का सामाजिक संपर्क कम होता है, उनमें कैंसर होने की संभावना दूसरों की तुलना में अधिक हो सकती है.

रिसर्च का उद्देश्य और डेटा

यह अध्ययन चीन के शोधकर्ताओं ने किया, जिन्होंने यूनाइटेड किंगडम के 3.5 लाख से अधिक वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया. यह डेटा UK बायोबैंक से लिया गया था और इसमें 38 से 73 साल की उम्र के लोगों को शामिल किया गया था. अध्ययन की शुरुआत में सभी प्रतिभागी कैंसर से मुक्त थे.

शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों से कई सवाल पूछे, जैसे कि वे कितने लोगों के साथ रहते हैं, परिवार या दोस्तों से कितनी बार मिलते हैं और क्या वे नियमित रूप से सामाजिक गतिविधियों में भाग लेते हैं. इन सवालों के आधार पर यह तय किया गया कि कौन व्यक्ति सामाजिक रूप से अलग-थलग है और कौन नहीं.

सोशल आइसोलेशन कैसे मापा गया

रिसर्च में सामाजिक अलगाव को मापने के लिए एक पॉइंट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया. अगर कोई व्यक्ति अकेले रहता था तो उसे एक पॉइंट दिया गया. यदि वह महीने में एक बार से भी कम अपने दोस्तों या परिवार से मिलता था तो उसे एक और पॉइंट मिला. इसी तरह यदि वह हफ्ते में किसी भी सामाजिक गतिविधि में भाग नहीं लेता था तो उसे तीसरा पॉइंट दिया गया.

जिन लोगों का स्कोर दो या उससे अधिक था, उन्हें सोशली आइसोलेटेड माना गया. कुल प्रतिभागियों में लगभग 6 प्रतिशत लोग इस श्रेणी में आए. इसके अलावा लगभग 15,942 लोगों ने बताया कि वे अक्सर अकेलापन महसूस करते हैं और अपनी भावनाओं को किसी से साझा नहीं कर पाते.

लंबे समय तक की गई निगरानी

शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को लगभग 12 वर्षों तक फॉलो किया. इस दौरान 38,000 से अधिक लोगों में कैंसर का पता चला. अध्ययन में कई संभावित कारकों को भी ध्यान में रखा गया, जैसे कि पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं, धूम्रपान की आदत, मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति और जीवनशैली.

इन सभी कारकों को समायोजित करने के बाद भी यह पाया गया कि सामाजिक अलगाव से कैंसर का खतरा लगभग 8 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. यह परिणाम इस बात की ओर इशारा करता है कि सामाजिक संबंधों की कमी स्वास्थ्य पर वास्तविक प्रभाव डाल सकती है.

महिलाओं पर ज्यादा प्रभाव

इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह था कि महिलाओं में सोशल आइसोलेशन का प्रभाव पुरुषों की तुलना में अधिक दिखाई दिया. जिन महिलाओं का सामाजिक संपर्क कम था, उनमें ब्रेस्ट कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, गर्भाशय कैंसर, ओवरी कैंसर और पेट के कैंसर का खतरा बढ़ा हुआ पाया गया.

विशेष रूप से, जो महिलाएं सामाजिक गतिविधियों में बहुत कम भाग लेती थीं, उनमें पेट के कैंसर का खतरा अन्य महिलाओं की तुलना में 84 प्रतिशत अधिक पाया गया. इसके अलावा ब्लैडर कैंसर का जोखिम भी सामाजिक रूप से अलग रहने वाली महिलाओं में अधिक देखा गया.

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अकेलापन और सोशल आइसोलेशन में अंतर

रिसर्चर्स ने यह भी स्पष्ट किया कि अकेलापन और सोशल आइसोलेशन एक जैसे नहीं होते. अकेलापन एक भावनात्मक अनुभव है, जबकि सोशल आइसोलेशन एक वास्तविक स्थिति है जिसमें व्यक्ति का सामाजिक संपर्क सीमित हो जाता है.

अध्ययन में पाया गया कि अकेलेपन का पूरी आबादी पर कैंसर के खतरे पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा. हालांकि 49 साल से कम उम्र के लोगों और नौकरी करने वाले समूहों में यह थोड़ा अलग पैटर्न दिखा, जहां अकेलापन कुछ मामलों में कैंसर के कम जोखिम से जुड़ा दिखाई दिया.

संभावित कारण

शोधकर्ताओं के अनुसार सामाजिक अलगाव शरीर में कई जैविक और व्यवहारिक बदलाव पैदा कर सकता है. जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक अकेला रहता है, तो उसमें तनाव का स्तर बढ़ सकता है. इसके साथ ही शरीर में इन्फ्लेमेशन यानी सूजन से जुड़े बायोलॉजिकल प्रोसेस सक्रिय हो सकते हैं, जो कैंसर के विकास में योगदान दे सकते हैं.

इसके अलावा सामाजिक अलगाव जीवनशैली को भी प्रभावित कर सकता है. ऐसे लोग अक्सर कम शारीरिक गतिविधि करते हैं, अनहेल्दी खानपान अपनाते हैं या मानसिक तनाव से जूझते हैं. ये सभी कारक मिलकर कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं.

ब्लैडर और ब्रेस्ट कैंसर की स्थिति

ब्लैडर कैंसर यूनाइटेड किंगडम में दस सबसे आम कैंसरों में से एक है. हर साल लगभग 18,000 नए मामले सामने आते हैं और करीब 6,000 लोगों की मौत इस बीमारी से होती है. हालांकि अगर इसका जल्दी पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है, लेकिन इसके लक्षण कई बार सामान्य यूरिनरी समस्याओं जैसे दर्द, थकान या पेशाब के दौरान जलन के रूप में दिखाई देते हैं.

वहीं ब्रेस्ट कैंसर भी तेजी से बढ़ता हुआ कैंसर है. यूके में लगभग हर सात में से एक महिला को जीवन में कभी न कभी इस बीमारी का सामना करना पड़ सकता है.

बदलने योग्य जोखिम कारक

शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े कई जोखिम कारक ऐसे हैं जिन्हें बदला जा सकता है. इनमें मोटापा, हाई ब्लड शुगर, धूम्रपान, सेकंड हैंड स्मोक, अत्यधिक शराब का सेवन, कम शारीरिक गतिविधि और ज्यादा रेड मीट का सेवन शामिल हैं.

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