Cervical Cancer Symptoms: क्या आप जानती हैं कि सर्वाइकल कैंसर दुनिया का एकमात्र ऐसा कैंसर है जिसे पूरी तरह रोका जा सकता है? इसके बावजूद, संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल लाखों महिलाएं इसकी शिकार हो रही हैं। भारत जैसे विकासशील देशों में स्थिति और भी गंभीर है, जहाँ जानकारी के अभाव और लोकलाज के कारण महिलाएं अक्सर इसके लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देती हैं। इस ‘साइलेंट किलर’ को मात देने के लिए सही जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार है। आइए जानते हैं सर्वाइकल हेल्थ से जुड़े उन मिथकों और तथ्यों के बारे में, जो हर महिला के लिए जानना बेहद जरूरी है।
Q1. सर्वाइकल हेल्थ का मतलब क्या होता है?
उत्तर: सर्वाइकल हेल्थ का अर्थ है गर्भाशय के निचले हिस्से, जिसे सर्विक्स कहा जाता है, को स्वस्थ बनाए रखना. महिलाओं के प्रजनन तंत्र में सर्विक्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और यहीं से सर्वाइकल कैंसर की शुरुआत हो सकती है.
मिथक: सर्वाइकल कैंसर केवल शादीशुदा या अधिक उम्र की महिलाओं को होता है?
तथ्य: यह एक आम गलतफहमी है. सर्वाइकल कैंसर कम उम्र की महिलाओं को भी हो सकता है. इसका संबंध शादी या उम्र से कम और एचपीवी (HPV) संक्रमण से अधिक होता है.
Q2. सर्वाइकल कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण क्या है?
उत्तर: सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) है. यह एक बहुत सामान्य वायरस है, जो त्वचा से त्वचा के संपर्क के माध्यम से फैल सकता है. कई मामलों में महिलाओं को यह पता भी नहीं चलता कि वे इस संक्रमण की चपेट में आ चुकी हैं.
Q3. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार सर्वाइकल कैंसर कितना गंभीर मुद्दा है?
उत्तर: United Nations के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में होने वाले उन कैंसरों में शामिल है जिन्हें रोका जा सकता है, इसके बावजूद हर साल लाखों महिलाओं की मौत इसी बीमारी के कारण हो जाती है. विकासशील और मध्यम आय वाले देशों में इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है.
मिथक: सर्वाइकल कैंसर में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते
तथ्य: शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण हल्के या न के बराबर हो सकते हैं, लेकिन बीमारी बढ़ने पर कुछ संकेत सामने आ सकते हैं, जैसे:
- असामान्य योनि रक्तस्राव
- पेल्विक क्षेत्र में दर्द
- शारीरिक संबंध के बाद रक्तस्राव
- असामान्य या बदबूदार डिस्चार्ज
इसी कारण नियमित जांच बहुत जरूरी मानी जाती है.
Q4. किन कारणों से सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है?
उत्तर: कुछ प्रमुख जोखिम कारक इस प्रकार हैं:
- एचपीवी संक्रमण
- समय पर स्क्रीनिंग न कराना
- धूम्रपान की आदत
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
- लंबे समय तक असुरक्षित यौन व्यवहार
मिथक: अगर कोई परेशानी नहीं है तो जांच की जरूरत नहीं
तथ्य: सर्वाइकल कैंसर अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी विकसित हो सकता है. इसलिए पैप स्मीयर टेस्ट और एचपीवी टेस्ट जैसी नियमित जांच जीवनरक्षक साबित हो सकती है.
Q5. सर्वाइकल कैंसर से बचाव कैसे किया जा सकता है?
उत्तर: सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए कुछ जरूरी कदम हैं:
- समय पर एचपीवी वैक्सीनेशन
- नियमित सर्वाइकल स्क्रीनिंग
- सुरक्षित यौन व्यवहार
- धूम्रपान से दूरी
- स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता
Q6. एचपीवी वैक्सीन को लेकर डर क्यों है?
उत्तर: अक्सर गलत जानकारी के कारण लोग एचपीवी वैक्सीन से डरते हैं. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि यह वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी है और सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है.
Q7. क्या सर्वाइकल कैंसर पूरी तरह रोका जा सकता है?
उत्तर: अगर समय पर वैक्सीनेशन, नियमित जांच और जागरूकता को अपनाया जाए, तो सर्वाइकल कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है. यही कारण है कि इसे एक “preventable cancer” कहा जाता है.