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Causes of kidney failure in children: बच्चों में किडनी खराब होने के ये संकेत न करें नजरअंदाज, छोटी गलती पड़ सकती है भारी, जानें लक्षण और इलाज

Causes of kidney failure in children: बच्चों में बार-बार पेशाब में जलन, सूजन, कमजोरी, भूख न लगना या पेशाब के रंग में बदलाव जैसे लक्षण किडनी रोग का संकेत हो सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार भारत में लगभग 1.5 से 3 प्रतिशत बच्चों में किडनी से जुड़ी समस्याएं पाई जाती हैं.

By: Ranjana Sharma | Published: March 15, 2026 4:04:42 PM IST



Causes of kidney failure in children: छोटे बच्चे जब रोते हैं या बार-बार बीमार पड़ते हैं तो माता-पिता अक्सर इसे सामान्य समझ लेते हैं. भूख लगना, नींद न आना, बुखार या पेट दर्द जैसी समस्याएं बच्चों में आम मानी जाती हैं. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक कई बार यही संकेत किसी गंभीर बीमारी की शुरुआत भी हो सकते हैं. खासकर अगर बच्चे को पेशाब से जुड़ी परेशानी, सूजन या लगातार कमजोरी महसूस हो रही हो, तो यह किडनी से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है. समय रहते इलाज न होने पर यह समस्या गंभीर होकर डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट तक पहुंच सकती है.

कितनी आम है बच्चों में किडनी की बीमारी

किडनी शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है. इसका मुख्य काम शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालना और खून को साफ रखना है. इसके अलावा किडनी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, रेड ब्लड सेल्स बनाने और हड्डियों को स्वस्थ रखने में भी अहम भूमिका निभाती है. जब बच्चों की किडनी ठीक से काम नहीं करती तो इसे पीडियाट्रिक किडनी डिजीज कहा जाता है. यह बीमारी अचानक भी हो सकती है और धीरे-धीरे भी विकसित हो सकती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भारत में लगभग 1.5 से 3 प्रतिशत बच्चों में किसी न किसी रूप में किडनी से जुड़ी समस्या पाई जाती है. वहीं अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में लगभग हर 25 में से एक बच्चा किडनी संबंधी परेशानी से प्रभावित हो सकता है. इसलिए डॉक्टर बच्चों में पेशाब से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं. किडनी की बीमारी के दो प्रमुख प्रकार हैं…

एक्यूट किडनी डिजीज

इस स्थिति में किडनी की कार्यक्षमता अचानक प्रभावित होती है. संक्रमण, डिहाइड्रेशन या अन्य बीमारी के कारण यह समस्या हो सकती है. सही समय पर इलाज मिलने पर यह ठीक भी हो सकती है.

क्रोनिक किडनी डिजीज

इस बीमारी में किडनी धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है. लंबे समय तक इलाज न मिलने पर यह किडनी फेलियर तक पहुंच सकती है.

किडनी खराब होने के शुरुआती संकेत

  • बार-बार पेशाब में जलन या दर्द
  • पेशाब में खून या रंग का बदलना
  • आंखों, चेहरे, पैरों या पेट में सूजन
  • बार-बार उल्टी, पेट दर्द या भूख न लगना
  • जल्दी थक जाना या कमजोरी महसूस होना
  • बच्चे का चिड़चिड़ा या उदास हो जाना
  • सामान्य से कम विकास या हाइट का रुक जाना
  • रात में बिस्तर गीला करना
  • पेशाब से तेज बदबू आना

किन कारणों से होती है बच्चों की किडनी खराब

  • बच्चों में किडनी रोग कई वजहों से हो सकता है.
  • जन्म से किडनी का सही तरीके से विकसित न होना
  • जेनेटिक बीमारियां जैसे पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज
  • बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI)
  • मूत्र का उल्टी दिशा में किडनी की ओर जाना
  • नेफ्रोटिक सिंड्रोम जैसी स्थिति
  • गंभीर संक्रमण, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज
  • इन कारणों से किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे प्रभावित हो सकती है.

जांच कैसे होती है

  • यदि डॉक्टर को किडनी रोग का संदेह होता है तो कुछ जरूरी जांच कराई जाती हैं.
  • ब्लड टेस्ट से किडनी की कार्यक्षमता का पता लगाया जाता है
  • यूरिन टेस्ट से प्रोटीन, खून या संक्रमण की जांच होती है
  • अल्ट्रासाउंड से किडनी के आकार और संरचना का पता चलता है
  • गंभीर मामलों में बायोप्सी भी की जा सकती है

बच्चों को कैसे बचाया जा सकता है

  • बच्चे को पर्याप्त पानी पिलाना
  • साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना
  • संतुलित और पौष्टिक आहार देना
  • पेशाब से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करना
  • समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराना

समय पर पहचान ही सबसे बड़ी सुरक्षा

डॉक्टरों के अनुसार बच्चों में किडनी की बीमारी अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं. ऐसे में माता-पिता की सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा साबित हो सकती है. अगर बच्चा बार-बार पेशाब की समस्या, सूजन या लगातार कमजोरी महसूस कर रहा है तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है. सही समय पर उठाया गया कदम बच्चे के भविष्य को सुरक्षित बना सकता है.

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