लाल,नीले, हरे! ट्रेन के स्पीड से जुड़ा है रंगों का कनेक्शन, जानकर चौंक जाएंगे

Indian Railway: भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में विविधता की आसानी से पहचान करने के लिए अलग-अलग रंगों के कोचों का इस्तेमाल शुरू किया। नैरो गेज लाइनों पर चलने वाली मीटर गेज ट्रेनों में भूरे रंग के कोच इस्तेमाल किए जाते हैं।

Published by Ashish Rai

Train Coaches Colour: अगर आपने अपनी रेल यात्रा के दौरान ट्रेन के डिब्बों के रंग पर ध्यान दिया होगा, तो आपने देखा होगा कि ट्रेनों में अलग-अलग रंगों के डिब्बे होते हैं। हालाँकि बहुत कम लोगों को पता होगा कि ट्रेन के डिब्बों के अलग-अलग रंगों के पीछे कई कारण छुपे होते हैं। ट्रेन के डिब्बों के रंग और डिज़ाइन के भी अलग-अलग मायने होते हैं। दरअसल, डिब्बों का रंग और डिज़ाइन ट्रेनों की खासियत के हिसाब से तय होता है। साथ ही, आप डिब्बों को देखकर ट्रेन की स्पीड का भी अनुमान लगा सकते हैं।

रेलवे ट्रेनों में कई अलग-अलग रंगों के डिब्बे भी लगाता है। इससे यात्रियों के लिए ट्रेनों की पहचान करना बहुत आसान हो जाता है। आइए जानते हैं कि रेलवे में डिब्बों के अलग-अलग रंगों का क्या मतलब है और आप इनसे ट्रेन की गति का अंदाज़ा कैसे लगा सकते हैं।

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शताब्दी और राजधानी में लाल रंग के डिब्बे होते हैं

भारतीय रेलवे की शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों में ज़्यादातर लाल रंग के डिब्बे लगाए जाते हैं। एल्युमीनियम से बने होने के कारण, ये डिब्बे अन्य डिब्बों की तुलना में काफ़ी हल्के होते हैं। यही बड़ा कारण है कि ये डिब्बे तेज़ गति वाली ट्रेनों में लगाए जाते हैं। डिस्क ब्रेक की वजह से आपात स्थिति में इन डिब्बों को तुरंत रोका जा सकता है। ये डिब्बे वर्ष 2000 में जर्मनी से लाए गए थे। लाल डिब्बों वाली ट्रेनों की गति 160 से 200 किमी प्रति घंटा होती है।

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एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों में नीले रंग के कोच होते हैं

आपने गौर किया होगा कि इंडियन रेलवे की अधिकतर ट्रेनों में नीले रंग के कोच होते हैं। दरअसल, इन कोचों को इंटीग्रल कोच कहा जाता है। ये कोच एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों में लगाए जाते हैं। ये लोहे के बने होते हैं, इसलिए इनका वज़न अत्यधिक होता है। इन्हें रोकने के लिए एयर ब्रेक का उपयोग किया जाता है। इन डिब्बों को केवल 70 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ही चलाया जा सकता है।

इस ट्रेन के कोच होते हैं हरे और भूरे

भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में विविधता की आसानी से पहचान करने के लिए अलग-अलग रंगों के कोचों का इस्तेमाल शुरू किया। नैरो गेज लाइनों पर चलने वाली मीटर गेज ट्रेनों में भूरे रंग के कोच इस्तेमाल किए जाते हैं। वहीं, गरीब रथ ट्रेनों में अधिकतर हरे रंग के कोच इस्तेमाल किए जाते हैं। कई बार इन पर अलग-अलग तरह की पेंटिंग भी की जाती है, जिससे कोच और भी आकर्षक लगता है।

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Ashish Rai

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