Religion Decline: जैसा की आप सभी जानते हैं कि इस पूरी दुनिया में हर धर्म जाति और समुदाय के लोग रेहते हैं. वहीं इनकी धार्मिक क्रियाएं भी अलग-अलग होती हैं. हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के अलावा भी दुनिया भर में काफी धर्म हैं, जैसे जैन धर्म, बौद्ध धर्म, यहूदी और भी कई. प्यू रिसर्च सेंटर की एक स्टडी से इस बात का खुलासा हुआ है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग खासकर पश्चिमी देशों में धर्म से दूर होते जा रहे हैं. चलिए देखें कि सभी धर्मों में से किस धर्म को छोड़ने वालों की दर सबसे ज़्यादा है.
किस धर्म को छोड़ रहे लोग ?
प्यू रिसर्च सेंटर के डे से इस बात का खुलासा हुआ है कि, बौद्ध धर्म दुनिया का एकमात्र ऐसा बड़ा धर्म है जिसकी कुल आबादी में इस समय गिरावट देखी जा रही है. बौद्ध धर्म छोड़ने वालों की दर काफ़ी ज़्यादा है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बौद्ध धर्म में पले-बढ़े हर 100 लोगों में से 22 लोग आखिरकार इस धर्म को छोड़ देते हैं, जबकि सिर्फ़ 12 नए लोग इससे जुड़ते हैं. नतीजतन, धर्म बदलने और लोगों के छोड़ने की वजह से, बौद्ध धर्म को हर 100 लोगों पर लगभग 10 लोगों का कुल नुकसान हो रहा है.
साथ ही बता दें कि बौद्ध आबादी की औसत उम्र दुनिया के औसत से काफ़ी ज़्यादा है. इसके अलावा, उनकी प्रजनन दर किसी भी धार्मिक समूह में सबसे कम है, जो स्थिर आबादी बनाए रखने के लिए ज़रूरी 2.1 के स्तर से काफ़ी नीचे है. रिसर्च के मुताबिक, व्यस्त जीवनशैली, विज्ञान की तरफ़ झुकाव, और पारंपरिक रीति-रिवाजों से दूरी ने युवा पीढ़ी को इस धर्म से दूर कर दिया है.
40% लोग छोड़ चुके धर्म
बौद्ध धर्म से जुड़े करीब 40% लोग अब खुद को किसी भी धर्म से जुड़ा हुआ नहीं मानते. दक्षिण कोरिया में यह संख्या और ज्यादा है, वहाँ 42% लोग बौद्ध धर्म छोड़ चुके हैं. 2010 से 2020 के बीच दुनिया में बौद्धों की संख्या लगभग 1.9 करोड़ कम हो गई. दक्षिण कोरिया में तो करीब 50% लोग बड़े होने पर अपना जन्म का धर्म छोड़ देते हैं. ज्यादातर लोग धर्म छोड़ने के बाद किसी दूसरे धर्म को नहीं अपनाते, बल्कि “बिना धर्म वाले” लोगों में शामिल हो जाते हैं. इस समूह में नास्तिक, अज्ञेयवादी या वे लोग आते हैं जो किसी भी धर्म से जुड़ाव नहीं रखते. 2010 से 2020 के बीच ऐसे लोगों की संख्या 27 करोड़ बढ़ गई.
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