कैसे साल 2025 ने बदल दी अनाया बांगड़ की जिंदगी, सोशल मीडिया पर छलका दर्द..!

Anaya Bangar: अनाया बांगड़ ने सोशल मीडिया पर अपने एक साल के सफर को शेयर किया. जेंडर बदलाव, मानसिक संघर्ष, रियलिटी शो और क्रिकेट से दोबारा जुड़ाव तक उनका साल बदलावों से भरा रहा.

Published by sanskritij jaipuria

Anaya Bangar: पूर्व क्रिकेटर संजय बांगड़ की संतान अनाया बांगड़ हाल के समय में चर्चा में रही हैं. उन्होंने अपने जीवन से जुड़ा एक अहम फैसला लिया और जेंडर चेंज प्रक्रिया के बाद अपनी पहचान को खुलकर अपनाया. अनाया सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हैं और अपने एक्सपीरिएंस को लोगों के साथ शेयर करती हैं.

अनाया ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने बीते एक साल की भावनात्मक और निजी यात्रा के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि ये समय उनके लिए आसान नहीं था, बल्कि कई अंदरूनी संघर्षों और बदलावों से भरा रहा.

साल की शुरुआत संघर्ष से हुई

अनाया के अनुसार साल की शुरुआत खुद से जूझने से हुई. ये दौर बाहरी दुनिया से ज्यादा अंदर की लड़ाइयों का था. डर, बीता हुआ समय और दूसरों की उम्मीदों का बोझ इन सबने उन्हें मानसिक रूप से थका दिया. ये समय आगे की योजना बनाने से ज्यादा टिके रहने का था.

कुछ महीनों बाद अनाया अपने असली रूप में भारत लौटीं. उन्होंने बताया कि घर लौटने पर उन्हें अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं मिलीं कहीं अपनापन, तो कहीं विरोध. इसी दौरान उन्होंने सीखा कि हिम्मत हमेशा ऊंची आवाज में नहीं होती, कई बार ये सिर्फ डटे रहने का नाम होती है.

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 शारीरिक और मानसिक बदलाव का दौर

साल के बीच के महीने अनाया के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रहे. इस समय उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी अहम चिकित्सीय प्रक्रियाएं पूरी कीं. ये समय धैर्य, दर्द और खुद पर भरोसा रखने का था. उन्होंने पुराने डर और पहचान को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने का फैसला किया.

रियलिटी शो से मिली पहचान

इसके बाद अनाया ने रियलिटी शो राइज एंड फॉल के जरिये टीवी की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने बताया कि इस मंच से पहचान तो मिली, लेकिन साथ ही लोगों की राय और आलोचना का सामना भी करना पड़ा. इस अनुभव ने उन्हें सिखाया कि शोर के बीच खुद से जुड़े रहना कितना जरूरी है.

क्रिकेट से दोबारा जुड़ाव

साल के आखिर में अनाया एक बार फिर क्रिकेट से जुड़ीं. उन्होंने साफ किया कि ये कदम शोहरत या तालियों के लिए नहीं था, बल्कि खुद को याद दिलाने के लिए था कि कुछ सपने कभी खत्म नहीं होते, बस सही समय का इंतजार करते हैं.

अनाया बांगड़ की ये कहानी बदलाव, आत्म-स्वीकृति और धैर्य की मिसाल है. उनका मानना है कि हर इंसान की यात्रा अलग होती है और खुद के सच के साथ जीना ही सबसे बड़ी जीत है.

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