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JEE Success Story: 360 में से 192 अंक पाकर JEE क्रैक, क्या थी अनन्या की खास स्ट्रैटेजी?

JEE Success Story: उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर वाराणसी की रहने वाली अनन्या त्रिपाठी ने यह साबित कर दिया है कि बड़े सपने जुनून से पूरे होते है. आज जानेंगे सफलता की कहानी?

By: Mohammad Nematullah | Published: January 24, 2026 7:21:01 PM IST



JEE Success Story: उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर वाराणसी की रहने वाली अनन्या त्रिपाठी ने यह साबित कर दिया है कि बड़े सपने जुनून से पूरे होते हैं, न कि जगह से सीमित होते है. अपने शहर के एकेडमिक नियमों और पारंपरिक करियर रास्तों से हटकर अनन्या ने टेक्नोलॉजी की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया है. IIT दिल्ली में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में एडमिशन पाने में सफल रही है. 

टेक्नोलॉजी के प्रति जुनून-परिवार से प्रेरणा

छोटी उम्र से ही अनन्या को टेक्नोलॉजी और लॉजिकल सोच में दिलचस्पी थी. मुश्किल समस्याओं को हल करना और नए समाधान ढूंढना उनके लिए कोई चुनौती नहीं थी, बल्कि एक रोमांचक काम था. उनके बड़े भाई की JEE परीक्षा में सफलता ने उनकी आकांक्षाओं को और बढ़ाया है. उनसे प्रेरित होकर उन्होंने इंजीनियरिंग को अपने करियर के रूप में चुना और पूरी लगन से अपनी तैयारी में जुट गई. JEE Main में अनन्या ने 99.49 परसेंटाइल हासिल किया है. जबकि JEE Advanced में उन्होंने 360 में से 192 अंक प्राप्त किए, और 1518 की CRL रैंक हासिल की है. ​​उन्होंने GEN-EWS कैटेगरी में 133वीं रैंक हासिल की है.

कॉन्सेप्ट की समझ-टाइम मैनेजमेंट: सफलता का मंत्र

अनन्या के अनुसार जो उत्तर प्रदेश से एकमात्र महिला रैंक होल्डर है, गणित उनका सबसे मजबूत विषय था. उनका मानना ​​है कि कॉन्सेप्ट की स्पष्ट समझ और प्रभावी टाइम मैनेजमेंट JEE जैसी परीक्षाओं में सफलता की नींव है. लंबे समय तक पढ़ाई करने के बजाय, उन्होंने स्मार्ट स्टडी पर ध्यान दिया, जिसमें स्पष्टता, निरंतरता और टारगेटेड प्रैक्टिस को प्राथमिकता दी है.

केमिस्ट्री के लिए उन्होंने NCERT की किताबों पर भरोसा किया और नियमित रूप से ऑब्जेक्टिव सवालों का अभ्यास किया है. अपनी गलतियों को समझने और अपने कमजोर क्षेत्रों पर काम करने के लिए मॉक टेस्ट देना उनकी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था.

पढ़ाई की रणनीति, वीकेंड पर टेस्ट

अनन्या रोजाना लगभग 9-10 घंटे पढ़ाई करती थी. हफ्ते के दिन नोट्स और असाइनमेंट के लिए समर्पित थे, जबकि वीकेंड मॉक टेस्ट और मुश्किल टॉपिक से निपटने के लिए रखे गए थे. उन्होंने सोशल मीडिया से सीमित दूरी बनाए रखी, इसका इस्तेमाल केवल मानसिक ब्रेक के लिए किया करती थी.

परीक्षा का तरीका और सफलता का संदेश

परीक्षा के दौरान अनन्या ने पहले आसान सवाल हल किए और बाद में मुश्किल सवालों पर लौटीं है. आखिरी हफ्तों में उन्होंने पूरी तरह से रिवीजन और फॉर्मूले पर ध्यान दिया है. उनका मानना ​​है कि लगातार कड़ी मेहनत, शांत दिमाग और ईमानदारी से तैयारी किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी है. 

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