JNU News: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) एक बार फिर विवाद में है. गुरुवार शाम को वाइस चांसलर शांतिश्री धुलीपुरी पंडित के खिलाफ प्रोटेस्ट करते समय उनकी पुलिस से झड़प हो गई है. अपनी मांगों को लेकर “लॉन्ग मार्च” पर निकले JNU स्टूडेंट्स की दिल्ली पुलिस से झड़प हो गई है. मामला इतना बिगड़ गया कि पुलिस को स्टूडेंट्स को जबरन हिरासत में लेकर बसों में भरना पड़ा है. इस दौरान सड़कों पर “अंबेडकर-अंबेडकर” के नारा गूंजता रहा है. प्रोटेस्ट करने वालों ने पुलिस पर “गलत व्यवहार” के गंभीर आरोप लगाया है.
- JNU में प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स ने पुलिस को अल्टीमेटम दिया था. उन्होंने हिरासत में लिए गए स्टूडेंट्स को रात 9 बजे तक रिहा करने की मांग की, नहीं तो वे पुलिस स्टेशन का घेराव करेंगा. पुलिस ने स्टूडेंट्स से कॉलेज के अंदर जाने की अपील की है. हालांकि स्टूडेंट्स अभी भी यूनिवर्सिटी गेट पर प्रोटेस्ट कर रहा है.
- पुलिस द्वारा JNUSU स्टूडेंट्स को गिरफ्तार करने के बाद jnusu_official ने इंस्टाग्राम पर पुलिस से पुलिस स्टेशन का घेराव करने की अपील की है. स्टूडेंट लीडर ने एक वीडियो में अपील की, जिसमें स्टूडेंट्स से रात 9 बजे वसंत कुंज पुलिस स्टेशन के घेराव में शामिल होने को कहा गया है.
क्या हुआ था?
स्टूडेंट्स का यह गुस्सा अचानक नहीं भड़का है. इस प्रोटेस्ट और “लॉन्ग मार्च” के पीछे JNU स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) की कई खास मांगें थीं. स्टूडेंट्स लंबे समय से UGC रेगुलेशन को लागू करने और कैंपस में उन्हें ठीक से लागू करने की मांग कर रहे है. उन्होंने JNU के मौजूदा वाइस चांसलर (VC) पर “जातिवादी” होने का आरोप लगाया है, और उन्हें तुरंत सस्पेंड करने की मांग की है. प्रोटेस्ट के दौरान उन्होंने JNUSU के मौजूदा पदाधिकारियों और पूर्व प्रेसिडेंट के गलत तरीके से निकाले गए (रस्ट्रेशन) को तुरंत वापस लेने की भी मांग की है.
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सड़क पर संघर्ष और पुलिस एक्शन
जैसे ही स्टूडेंट्स की भीड़ सड़कों पर उतरी, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया था. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्टूडेंट्स को प्रोटेस्ट करने से साफ मना किया गया था, लेकिन वे हंगामा करते रहे है. जब स्टूडेंट्स चेतावनी के बावजूद नहीं माने, तो पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती हिरासत में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी. पुलिस और प्रोटेस्ट करने वालों के बीच तीखी झड़प हुई. सड़क पर अफरा-तफरी मच गई और पुलिस ने एक-एक करके प्रदर्शनकारियों को बसों में घसीटना शुरू कर दिया है.
करीब 40 से 50 स्टूडेंट्स को हिरासत में
इसके बावजूद स्टूडेंट यूनियन के अधिकारियों जिनमें प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा, वाइस प्रेसिडेंट गोपिका के. बाबू, जनरल सेक्रेटरी सुनील यादव, जॉइंट सेक्रेटरी दानिश अली और पूर्व प्रेसिडेंट नीतीश कुमार शामिल थे, लेफ्ट-विंग स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन के सपोर्टर्स के साथ बैरिकेड्स हटाकर बाहर निकलने की कोशिश की है.
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जैसे ही ये स्टूडेंट्स मेन गेट पार करने लगे है. पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और उन्हें हिरासत में ले लिया है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक अब तक करीब 40 से 50 स्टूडेंट्स को हिरासत में लिया गया है, जबकि मौके पर 2,000 से 3,000 लोगों की भीड़ जमा हो गई थी.
स्टूडेंट लीडर्स के गंभीर आरोप
JNUSU प्रेसिडेंट अदिति ने इस पुलिस एक्शन को “बर्बर” बताया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने निहत्थे स्टूडेंट्स के साथ बेरहमी की है. इस पूरे हंगामे में सबसे चर्चित नाम JNUSU के जॉइंट सेक्रेटरी दानिश का है. स्टूडेंट यूनियन का दावा है कि दानिश को “बेरहमी” से हिरासत में लिया गया और उसके साथ मारपीट की गई है.
हिरासत में लिए गए स्टूडेंट्स ने पुलिस बसों से चिल्लाकर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया है. उन्होंने कहा, “हम बस एक शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, लेकिन ये लोग हमें अपनी बात कहने नहीं दे रहे है. पुलिस हमारे साथ बुरा बर्ताव कर रही है और हमें परेशान कर रही है.”

