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Excise policy case: आबकारी नीति केस: केजरीवाल-सिसोदिया ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखा पत्र, की ये मांगे

Excise policy case: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों ने आबकारी नीति मामले की सुनवाई दूसरी पीठ को सौंपने की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है. उन्होंने न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के समक्ष निष्पक्ष सुनवाई को लेकर संदेह जताया है.

By: Ranjana Sharma | Published: March 11, 2026 6:59:35 PM IST



Excise policy case: आबकारी नीति मामले में नया मोड़ आ गया है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मामले की सुनवाई दूसरी पीठ को सौंपने की मांग की है. पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के सामने निष्पक्ष सुनवाई को लेकर संदेह पैदा हो रहा है, इसलिए न्याय में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए इस मामले को किसी अन्य पीठ को सौंपा जाना चाहिए.

‘इंसाफ होना ही नहीं, दिखना भी चाहिए’

अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा कि यदि यही पीठ इस मामले की सुनवाई जारी रखती है तो निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं हो पाएगी. उन्होंने कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखाई भी देना चाहिए. पत्र में यह भी कहा गया है कि न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के कुछ फैसलों और टिप्पणियों से आरोपियों के मन में संदेह पैदा हुआ है. केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने अपने पत्र में यह भी दावा किया है कि आबकारी नीति से जुड़े मामलों में दिए गए कुछ आदेशों को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने  पलट दिया था और आरोपियों को राहत मिली थी. उन्होंने कहा कि पहले दिए गए कई आदेशों में किसी भी आरोपी को राहत नहीं दी गई थी, जबकि बाद में उच्चतम न्यायालय ने अलग दृष्टिकोण अपनाया.

जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई पर रोक का मुद्दा

पत्र में यह भी कहा गया है कि आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका की पहली ही सुनवाई में दूसरे पक्ष को सुने बिना जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी गई. आरोपियों का कहना है कि इस तरह के निर्णयों से यह आशंका पैदा होती है कि मामले की सुनवाई निष्पक्ष तरीके से नहीं हो पाएगी.

हाल में सभी आरोपियों को नोटिस जारी

कुछ दिन पहले ही दिल्ली उच्च न्यायालय ने आबकारी नीति से जुड़े मामले में निचली अदालत द्वारा बरी किए गए केजरीवाल, सिसोदिया समेत 23 लोगों को नोटिस जारी किया था. इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की गई है. अदालत पहले ही मामले की जांच करने वाले अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के ट्रायल अदालत के आदेश पर रोक लगा चुकी है.

सीबीआई की याचिका पर सुनवाई जारी

इस मामले मेंकेंद्रीय जांच ब्यूरो ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. सीबीआई की ओर से दलील दी गई कि यह राजधानी से जुड़ा बड़ा मामला है और इसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच की गई है. एजेंसी ने दावा किया कि कथित साजिश के कई पहलुओं के सबूत जांच में सामने आए हैं और हवाला के माध्यम से धन के लेनदेन का भी आरोप लगाया गया है. हालांकि अदालत ने फिलहाल आरोपियों को मिली राहत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.

मामला क्यों है अहम 

आबकारी नीति से जुड़ा यह मामला पिछले कुछ समय से देश की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में रहा है. अब आरोपियों द्वारा सुनवाई दूसरी पीठ को सौंपने की मांग किए जाने से इस मामले में नया कानूनी और राजनीतिक मोड़ आ गया है. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्य न्यायाधीश इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और मामले की सुनवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है.

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