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सनस्क्रीन अलर्ट…खूबसूरती के नाम पर खिलवाड़, टेस्ट में ‘फेल’ हुए ये टॉप ब्रांड; क्या आपका भी इस लिस्ट में शामिल?

SPF Fail Sunscreens: सनस्क्रीन टेस्ट में 10 में से 6 ब्रांड्स फेल पाए गए. केवल 4 सनस्क्रीन ही लैब टेस्ट पास कर पाई हैं. इस लिस्ट में कई बड़ी-बड़ी कंपनियां शामिल है. इस खुलासे के बाद हर कोई हैरान रह गया है.

Published by Preeti Rajput

Sunscreen Lab Test: हम सभी अपनी स्किन को यूवी किरणों (UV Rays) से होने वाले जानलेवा हमले से बचाने के लिए सनस्क्रीन (Sunscreen) पर आंख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं. खासतौर पर गर्मियों में सनस्क्रीन का इस्तेमाल बढ़ जाता है. लेकिन अगर आपको पता लगे कि, जिसे आप सुरक्षा कवच समझ रहे हैं वह एक धोखा है? कंपनियां आपके साथ एक बड़ा स्कैम कर रही हैं. 

सन्सक्रीन के नाम में मिल रहा धोखा

हाल ही में हुए एक लैब टेस्ट (Sunscreen Scam) ने बाजार के बड़े-बड़े ब्रांड के दावों की पोल खोल कर रख दी है. इस लिस्ट में देश के सबसे बड़े ब्रांड शामिल हैं, जो इस टेस्ट में फेल (Sunscreen Lab Test) साबित हुए हैं. इस टेस्ट में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं. सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि जो ब्रांड SPF 50 का दावा करता है वह वास्तविकता में सन प्रोटेक्शन फैक्टर (SPF) 20 से भी कम पाया गया है. यहां बात सिर्फ पैसों की बर्बादी की नहीं है, यह स्किन कैंसर (Skin Cancer) जैसी जानलेना बीमारी को न्योता देना है. इस टेस्ट ने बड़ी-बड़ी कंपनियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं

10 में से 6 ब्रांड लैब टेस्ट में हुए फेल

इस लिस्ट में कई बड़े-बड़े ब्रांड शामिल है. जिन 10 सनस्क्रीन का टेस्ट किया गया उस लिस्ट में लोटस, डॉट एंड की, लैक्मे, डर्मा को, रहने आदि शामिल हैं. इनमें से केवल 4 सनस्क्रीन ही इस टेस्ट को पास कर पाई हैं. बाकि सभी 6 फेल साबित हुई हैं. जिस ब्रांड ने इस टेस्ट को पास किया है उसमेंलैक्मे, माइनमलिस्ट, डर्माको और एनालॉगिका (Lakme, Minemalist, Dermaco and analogica) शामिल हैं. वहीं जो ब्रांड लोगों को धोखा दे रहे हैं उस लिस्ट में डॉट एंड की, रैने, विशकेयर, लोटस और डिकंस्ट्रक्ट (Dot & Key, Renee, Wishcare, Lotus and Deconstruct) शामिल है. 

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स्किन कैंसर को मिल रहा न्यौता

सनस्क्रीन मुख्य काम हानिकारक UVA और UVB किरणों से बचाना होता है. लेकिन यह कंपनियां तो अपना ही फायदा देख रही हैं. इन्हें लोगों की सेहत, जान और पैसों से कोई फर्क नहीं पड़ता है. इनका मकसद तो सिर्फ मुनाफा कमाना है. SPF कम होने का मतलब है कि त्वचा को यूवीए और यूवीबी दोनों से किसी तरह की कोई सुरक्षा नहीं मिल रही है. बस चल रही है तो धोखाधड़ी. कम सेफ्टी वाली सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने से आपकी स्किन की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज होने लगती है. इसके साथ ही त्वचा कैंसर (Skin Cancer) का भी जौखिम बढ़ जाता है. आप सभी को ऐसे ब्रांड से सावधान रहना चाहिए और किसी भी चीज का इस्तेमाल करते समय उसकी बारे में पूरी जानकारी ले लेनी चाहिए.

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Preeti Rajput
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