Income Tax Refund : हर साल लाखों टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं और उसमें रिफंड की उम्मीद करते हैं. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपका ITR ‘Processed’ स्टेटस दिखा रहा होता है, फिर भी रिफंड आपके बैंक अकाउंट में जमा नहीं होता. यदि आप भी इस स्थिति का सामना कर रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. इस लेख में हम आपको बताएंगे कि रिफंड क्यों देरी से आता है और इसे कैसे ट्रैक करें.
एसेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 16 सितंबर 2025 थी. इस बार सरकार ने टैक्सपेयर्स को सुविधा देते हुए डेडलाइन को दो बार बढ़ाया. पहले ये तारीख 31 जुलाई थी, जिसे बाद में 15 सितंबर तक बढ़ाया गया और अंत में 16 सितंबर तक एक्सटेंशन मिला. हालांकि, नॉन-ऑडिट कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए ये डेडलाइन लागू हुई, वहीं ऑडिट केस वालों को ITR फाइल करने के लिए 31 अक्टूबर 2025 तक का समय दिया गया है.
रिफंड में देरी के मेन कारण
ITR प्रोसेस हो जाना मतलब ये नहीं कि रिफंड तुरंत आपके खाते में आ जाएगा. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
गलत बैंक विवरण या IFSC कोड: अगर आपने बैंक अकाउंट या IFSC कोड गलत दिया है, तो रिफंड अकाउंट में क्रेडिट नहीं हो पाता.
TDS या टैक्स क्रेडिट में गड़बड़ी: कई बार TDS की जानकारी या टैक्स क्रेडिट गलत होने से रिफंड प्रक्रिया में अड़चन आती है.
बैंकिंग ट्रांजेक्शन में देरी: रिफंड जारी हो जाने के बाद भी बैंकिंग सिस्टम में 15 से 30 दिन तक लेन-देन में देरी हो सकती है.
रिफंड स्टेटस कैसे चेक करें?
अगर आपका ITR प्रोसेस्ड है लेकिन रिफंड नहीं मिला, तो इन आसान स्टेप्स को फॉलो करें:
1. Income Tax e-filing पोर्टल पर लॉगिन करें.
2. Refund/Demand Status सेक्शन पर जाएं और अपनी स्थिति जांचें.
3. अगर रिफंड प्रोसेस हो गया है, लेकिन पैसा नहीं आया है, तो बैंक डिटेल्स और IFSC कोड को कन्फर्म करें.
4. यदि बैंक डिटेल्स सही है, तो पोर्टल पर जाकर ‘Refund Reissue Request’ डालें ताकि रिफंड फिर से जारी किया जा सके.
बैंक और NSDL से संपर्क करें
कभी-कभी तकनीकी कारणों से रिफंड बैंक तक पहुंचने में देर हो सकती है. यदि Refund Status में RFD कोड दिख रहा है, लेकिन पैसा नहीं मिला है, तो आप अपनी बैंक ब्रांच या NSDL के कस्टमर केयर से संपर्क कर सकते हैं. आमतौर पर, रिफंड प्रोसेस होने के 15 से 30 दिनों के भीतर बैंक अकाउंट में आ जाता है.
कौन से टैक्सपेयर्स को जल्दी मिलता है रिफंड?
नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स, जिनकी आय आमतौर पर सैलरी, बैंक इंटरेस्ट या अन्य साधारण स्रोतों से होती है, उनका रिटर्न तेजी से प्रोसेस होता है. ये टैक्सपेयर्स अपनी आय, डिडक्शन और TDS विवरण को सही तरीके से भरते हैं, जिससे सरकार को रिटर्न वेरिफाई और प्रोसेस करना आसान होता है.