Madhya Pradesh News: मुरैना जिले के मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत नाका इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है. पथरीले क्षेत्र में बसे इस गांव के ग्रामीण गर्मी के इस दौर में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं.
नदी से ला रहे पानी, पशु भी वहीं निर्भर
गांव में पेयजल की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीण अपनी और अपने पशुओं की प्यास बुझाने के लिए आसन नदी पर निर्भर हैं. लोग दूर-दूर से पानी भरकर ला रहे हैं, वहीं कुछ ग्रामीण गाड़ियों से पानी मंगवाकर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं.
फिल्टर प्लांट पास, फिर भी गांव प्यासा
ग्रामीणों का आरोप है कि उनके गांव से महज 2 किलोमीटर दूर एक पानी फिल्टर प्लांट स्थापित है, जिससे आसपास की 28 पंचायतों में पानी सप्लाई हो रही है, लेकिन नाका गांव आज भी इससे वंचित है.
सड़क खोदी, पाइपलाइन नहीं डाली
ग्रामीणों ने ठेकेदार पर मनमानी और लापरवाही के आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि गांव में पाइपलाइन डालने के नाम पर सड़कों को खोद दिया गया, लेकिन पाइप नहीं डाले गए. इससे सड़कों की हालत दलदल जैसी हो गई है और आवागमन भी प्रभावित हो रहा है.
पथरीला क्षेत्र बना बड़ी बाधा
गांव का भू-भाग पथरीला होने के कारण यहां हैंडपंप या नल खनन भी संभव नहीं है, जिससे जल संकट और गंभीर हो गया है.
हर घर नल-जल योजना पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की “हर घर नल-जल योजना” यहां पूरी तरह विफल नजर आ रही है और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है. भीषण गर्मी में हालात ऐसे हैं कि लोगों के सामने पीने के पानी तक का संकट खड़ा हो गया है.
प्रशासन से समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द गांव में पेयजल की समुचित व्यवस्था कराने और अधूरे पड़े कार्यों को पूरा करने की मांग की है, ताकि उन्हें इस भीषण गर्मी में राहत मिल सके.
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