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Fact Check: EC के लेटर पर BJP की मुहर! वायरल दस्तावेज़ से मचा सियासी तूफान; जानें क्या है सच्चाई?

election commission bjp symbol: यह विवाद तब शुरू हुआ जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPIM) केरल ने सोशल मीडिया पर एक दस्तावेज साझा किया.

By: Shubahm Srivastava | Published: March 23, 2026 11:26:55 PM IST



EC BJP Symbol letter Fact Check: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में होने वाले आगामी चुनावों से पहले एक पुराने दस्तावेज़ ने सियासी हलचल तेज कर दी है. 2019 का एक पत्र, जो भारत निर्वाचन आयोग (EC) से जुड़ा बताया जा रहा है, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इस पत्र पर कथित तौर पर BJP (केरल इकाई) की मुहर दिखाई देने के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए.

वायरल लेटर से मचा विवाद

यह विवाद तब शुरू हुआ जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPIM) केरल ने सोशल मीडिया पर एक दस्तावेज साझा किया. इसमें 19 मार्च 2019 के एक पत्र और उससे जुड़े हलफनामे पर बीजेपी की मुहर नजर आई. सीपीआईएम ने आरोप लगाया कि क्या अब चुनाव आयोग और बीजेपी एक ही पावर सेंटर से संचालित हो रहे हैं. इसके बाद विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाया और सवालों की बौछार कर दी.

कांग्रेस और विपक्ष के आरोप

Indian National Congress ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग के आधिकारिक दस्तावेज़ पर किसी राजनीतिक दल की मुहर होना बेहद चिंताजनक है. कांग्रेस नेताओं ने सवाल किया कि यह सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेह है जो संस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है. वहीं अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने और तीखा हमला करते हुए चुनाव आयोग को बीजेपी की ‘बी-टीम’ तक करार दिया.

चुनाव आयोग की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने बयान जारी कर इसे “क्लेरिकल एरर” यानी तकनीकी गलती बताया. आयोग के अनुसार, यह एक पुरानी गाइडलाइन की कॉपी थी, जिस पर बीजेपी की मुहर पहले से लगी थी और गलती से उसे अन्य राजनीतिक दलों को भेज दिया गया. आयोग ने कहा कि जैसे ही इस गलती का पता चला, इसे तुरंत सुधार लिया गया.

कार्रवाई और सस्पेंशन

इस मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में कार्यरत एक असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर को जांच पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया गया है. यह कदम यह दिखाने के लिए उठाया गया कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी.

चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी

चुनाव से ठीक पहले इस तरह का विवाद सामने आने से राजनीतिक माहौल और गरमा गया है. विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग इसे महज एक मानवीय त्रुटि बता रहा है. अब यह देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्या यह मामला चुनावी माहौल को और प्रभावित करता है.

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