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Chaitra Chhath: कब है चैत छठ, नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक जानें पूजा विधि और व्रत के नियम

Chaitra Chhath: चैती छठ हिंदू धर्म का पवित्र व्रत है, जो भगवान सूर्य और छठ माता की पूजा के लिए रखा जाता है. इसे सुख-सौभाग्य और दुखों से मुक्ति का पर्व माना जाता है.

By: Ranjana Sharma | Last Updated: March 23, 2026 12:49:43 PM IST



Chaitra Chhath Kab Hai: हिंदू धर्म में भगवान सूर्य और छठ माता की पूजा के लिए रखा जाने वाला छठ व्रत बेहद पवित्र माना जाता है. इसे सभी दुखों को दूर करने और जीवन में सुख-सौभाग्य लाने वाला पर्व कहा जाता है. चैत्र मास में मनाई जाने वाली चैती छठ विशेष रूप से श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है. इस व्रत में नहाय-खाय से लेकर उषा अर्घ्य तक के सभी दिन अलग महत्व रखते हैं और इन्हें सही विधि से करना जरूरी माना जाता है.

चैती छठ का शुभ प्रारंभ: नहाय-खाय

इस साल चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च 2026, रविवार से होगी. इस दिन को नहाय-खाय कहा जाता है. श्रद्धालु सुबह स्नान और ध्यान के बाद अपने कुल देवता और भगवान सूर्य की पूजा करते हैं. इस दिन कद्दू भात को भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. नहाय-खाय के दिन का उद्देश्य शरीर और मन को पवित्र करना और व्रत के लिए तैयार होना है.

दूसरा दिन: खरना

23 मार्च 2026, सोमवार को आता है खरना का दिन. यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन से साधक 36 घंटे का निर्जल व्रत शुरू करते हैं. शाम के समय श्रद्धालु छठी मैया को गुड़ की खीर और रोटी का भोग अर्पित करते हैं. खरना का दिन श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और संयम का प्रतीक है, जो व्रत को पूरा करने की तैयारी करता है.

तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य

24 मार्च 2026, मंगलवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है. इसे संध्या अर्घ्य कहा जाता है. इस दिन देशभर के पवित्र जलतीर्थों पर श्रद्धालु सूप में फल, ठेकुआ और पूजन सामग्री लेकर डूबते सूर्य की पूजा करते हैं. दिल्ली में सूर्यास्त शाम 06:34 बजे होगा. संध्या अर्घ्य से व्यक्ति अपने पिछले पापों और दुखों से मुक्ति पाकर मानसिक शांति अनुभव करता है.

चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण

25 मार्च 2026, बुधवार को छठ महापर्व का अंतिम दिन होता है. इसे उषा अर्घ्य कहा जाता है. श्रद्धालु प्रातःकाल 06:20 बजे उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इस दिन तन-मन से पवित्र होकर भगवान सूर्य और छठी माता का आशीर्वाद लिया जाता है. उषा अर्घ्य के बाद ही व्रत का पारण होता है और यह पावन पर्व संपन्न माना जाता है.

धार्मिक महत्व

चैती छठ व्रत आस्था, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है. नहाय-खाय से लेकर उषा अर्घ्य तक के प्रत्येक दिन का अपना महत्व है. यह व्रत न केवल सुख और समृद्धि लाने वाला माना जाता है, बल्कि परिवार और समाज में धार्मिक और नैतिक शिक्षा को भी जोड़ता है. इस पर्व में श्रद्धालु अपने तन और मन को पवित्र करते हुए भगवान सूर्य और छठ माता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

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