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Toll Fee Hike: 1 अप्रैल से महंगा होगा सफर, दिल्ली-एनसीआर बढ़ने जा रहा है टोल! NHAI का बड़ा फैसला

Delhi-Meerut Expressway toll: NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अरविंद कुमार के अनुसार, टोल शुल्क में लगभग 5% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. नई दरें 31 मार्च की आधी रात से लागू हो जाएंगी.

By: Shubahm Srivastava | Published: March 19, 2026 7:42:27 PM IST



Delhi-NCR Toll Increase: दिल्ली-NCR क्षेत्र में यात्रियों को अब यात्रा के लिए ज़्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं, क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) 1 अप्रैल से कुछ खास रास्तों पर टोल की दरें बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. इस प्रस्तावित बढ़ोतरी का असर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जैसे मुख्य रास्तों का इस्तेमाल करने वाले लाखों रोज़ाना यात्रियों पर पड़ेगा.

यह कदम, जो वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ उठाया जा रहा है, खासकर दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद, मेरठ और हापुड़ के बीच यात्रा करने वालों पर असर डालेगा, जिससे उनकी रोज़ाना की यात्राएँ और महँगी हो जाएँगी.

टोल बढ़ोतरी से प्रभावित होने वाले मुख्य रास्ते

यह प्रस्तावित बढ़ोतरी इन मुख्य रास्तों पर लागू होगी:

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे
राष्ट्रीय राजमार्ग 9

ये रास्ते दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच अहम कड़ी का काम करते हैं, और हर दिन लाखों वाहनों का आवागमन संभालते हैं.

टोल कितना बढ़ेगा?

NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अरविंद कुमार के अनुसार, टोल शुल्क में लगभग 5% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. नई दरें 31 मार्च की आधी रात से लागू हो जाएँगी. हालाँकि, टोल की आधिकारिक नई दरें अभी जारी नहीं की गई हैं, लेकिन मौजूदा दरों से यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि बढ़ोतरी कितनी हो सकती है.

मौजूदा टोल दरें और संभावित असर

अभी, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सराय काले खाँ से मेरठ तक कारों/जीपों के लिए टोल लगभग 170 रुपये है. NH-9 पर टोल लगभग 175 रुपये है.
हल्के कमर्शियल वाहनों को 275 रुपये से 280 रुपये के बीच टोल देना पड़ता है.
बसों और ट्रकों से 580 रुपये से 590 रुपये के बीच टोल लिया जाता है.
5% की बढ़ोतरी के बाद, कार चलाने वालों को हर यात्रा पर 8-10 रुपये ज़्यादा देने पड़ सकते हैं.

हालाँकि यह बढ़ोतरी कम लग सकती है, लेकिन अक्सर यात्रा करने वालों के मासिक और सालाना यात्रा खर्च में काफ़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. उदाहरण के लिए, रोज़ाना यात्रा करने वालों को हर महीने कई सौ रुपये ज़्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं.

टोल दरों में इस बदलाव का असर

टोल दरों में इस बदलाव का असर न केवल आम यात्रियों पर पड़ेगा, बल्कि व्यवसायों पर भी पड़ेगा. ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनियों का परिचालन खर्च बढ़ जाएगा, जिसका बोझ आखिरकार बढ़ी हुई कीमतों के रूप में ग्राहकों पर ही पड़ेगा, जिससे महँगाई बढ़ने की भी संभावना है. FASTag का सालाना पास हुआ महंगा टोल दरों में बदलाव के साथ-साथ, NHAI ने सालाना FASTag पास की कीमत भी 3,000 रुपये से बढ़ाकर 3,075 रुपये कर दी है.

कीमत बढ़ने के बावजूद, यह पास कई बड़े फायदे देता रहता है. एक बार खरीदने के बाद, यूज़र्स को इसे एक साल तक या 200 टोल प्लाज़ा पार करने तक (जो भी पहले हो) रिचार्ज करने की ज़रूरत नहीं पड़ती.

यह सुविधा खासकर उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जो अक्सर हाईवे पर सफर करते हैं; पूरे भारत में 56 लाख से ज़्यादा गाड़ी मालिक पहले से ही इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.

बेहतर टोलिंग सिस्टम की ओर कदम

सरकार टोल कलेक्शन को ज़्यादा असरदार और पारदर्शी बनाने के लिए नई-नई टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रही है. केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ‘पे-पर-यूज़’ (जितना इस्तेमाल, उतना भुगतान) मॉडल का प्रस्ताव रखा है.

इस सिस्टम के तहत, ड्राइवरों से पूरे हाईवे के बजाय सिर्फ़ उतनी ही दूरी का टोल लिया जाएगा जितनी उन्होंने तय की है. उदाहरण के लिए, अगर कोई सिर्फ़ 10-15 किलोमीटर का सफर करता है, तो उसे सिर्फ़ उसी दूरी का टोल देना होगा; इससे कम दूरी का सफर करने वालों को फ़ायदा होगा.

क्या अब टोल प्लाज़ा पर रुकना नहीं पड़ेगा?

आने वाले समय में टेक्नोलॉजी में होने वाले सुधारों की वजह से, टोल प्लाज़ा पर रुकने की ज़रूरत शायद जल्द ही खत्म हो जाएगी. हाई-स्पीड कैमरे और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचानने वाले सिस्टम 80 km/h तक की रफ़्तार से चल रही गाड़ियों को भी पहचान लेंगे और उनके FASTag को स्कैन कर लेंगे.

इस नई टेक्नोलॉजी से ये फ़ायदे होने की उम्मीद है:

सफर का समय कम होगा
ट्रैफ़िक जाम की समस्या कम होगी
ईंधन की खपत कम होगी

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