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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 पर भूतड़ी अमावस्या और खरमास का काला साया, भूलकर भी न करें ये मांगलिक कार्य

Chaitra Navratri 2026: इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत पर भूतड़ी अमावस्या और खरमास का काला साया पड़ रहा है. ज्योतिष शास्त्र में खरमास अशुभ माना जाता है. इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकते हैं.

By: Preeti Rajput | Published: March 14, 2026 7:28:33 PM IST



Chaitra Navratri 2026: साल 2026 में चैत्र नवरात्र की शुरुआत भूतड़ी अमावस्या और खरमास के काले साय में पड़ रही है. ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक, खरमास को अशुभ माना जाता है. इसलिए इस दौरान किसी तरह का कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. क्योंकि खरमास के दौरान सूर्य की ऊर्जा कमजोर हो जाती है. ऐसे में भक्तों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या खरमास के दौरान मां दुर्गा की पूजा सफल हो पाएगी? क्या इस दौरान रखे व्रत का फल मिलेगा?

चैत्र नवरात्र कब से शुरु होगी?

हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्र के शुरुआत होने वाली है. यह त्योहार नौ दिनों तक चलता है. पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च के दिन सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरु होने जा रहा है. जो 20 मार्च के दिन सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहने वाली है. उदय तिथि के मुताबिक, नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च को मानी जाएगी. 

क्या है खरमास?

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जब सूर्य मीन राशि में एंट्री करते हैं. तब खरमास की शुरुआत होती है. सूर्य के मेष राशि में जाने पर यह खत्म हो जाता है. इस एक महीने तक गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं. साल 2026 में खरमास 14 मार्च की रात रविवार से शुरु होगा, जिसका अंत 14 अप्रैल मंगलवार तक रहेगा. 

क्या होती है भूतड़ी अमावस्या?

पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 18 मार्च बुधवार के दिन सुबह 8 बजकर 25 मिनट से शुरू होने वाली है. जो गुरुवार दिन सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी. हिंदू धर्म में ज्यादातर व्रत और पर्व उदयातिथि के आधार पर मनाए जाते हैं. इसी कारण इस साल भूतड़ी या चैत्र अमावस्या 19 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी. माना जाता है कि इस दिन स्नान, तर्पण और दान करने का विशेष महत्व है.

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क्या सफल हो पाएगी पूजा-पाठ?

धर्म शास्त्रों के मुताबिक, खरमास के दौरान गुरु की राशि में सूर्य के होने से गुरु की शुभता कम हो जाता है. जिससे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, क्योंकि किसी भी मांगलिक काम के लिए गुरु का शुभ स्थिति में होना बेहद जरूरी होता है. लेकिन जब बात शक्ति की हो, तो नियम बदल जाते हैं. क्योंकि नवरात्र अपने आप में एक शुभ अवधि मानी जाती है. जिस पर खरमास का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ सकता है. शास्त्रों के मुताबिक, खरमास का समय पूजा-पाठ, दान और साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए आप बिना किसी डर के व्रत रख सकते हैं. 

नहीं करने चाहिए ये काम

  • नया कारोबार शुरू करने या बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने से बचें.
  • सगाई या शादी की तारीख पक्की न करें..
  • लहसुन और मांस का सेवन गलती से भी न करें.
  • घर में या बाहर किसी का भी अपमान न करें.

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