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Indian Army Women Officer: दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से दीक्षा त्रिपाठी ने रचा इतिहास, सेना के सबसे कठिन कोर्स को पूरा करने वाली पहली महिला बनीं

Indian Army Women Officer: भारतीय सेना की लेफ्टिनेंट दीक्षा त्रिपाठी ने पुणे में आयोजित आर्मी मार्शल आर्ट्स रूटीन (एएमएआर) कोर्स पूरा कर इतिहास रच दिया है. वह इस कठिन युद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम को पास करने वाली पहली महिला लड़ाकू अधिकारी बन गई हैं.

By: Ranjana Sharma | Published: March 11, 2026 9:41:14 PM IST



Indian Army Women Officer: भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी अब नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है. इसी कड़ी में सेना की महिला अधिकारी Diksha Tripathi ने पुणे स्थित सेना शारीरिक प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित आर्मी मार्शल आर्ट्स रूटीन (एएमएआर) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर इतिहास रच दिया है. इस कठिन युद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरा करने के साथ ही वह इस कोर्स में उत्तीर्ण होने वाली पहली महिला लड़ाकू अधिकारी बन गई हैं. उनकी इस उपलब्धि को सेना में महिलाओं की बढ़ती क्षमता और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जा रहा है.

शारीरिक और मानसिक ताकत की कड़ी परीक्षा

एएमएआर को भारतीय सेना के सबसे चुनौतीपूर्ण युद्ध-उन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रमों में गिना जाता है. इस कोर्स का उद्देश्य सैनिकों को नजदीकी युद्ध की परिस्थितियों के लिए तैयार करना है, जहां कई बार आग्नेय हथियार उपलब्ध नहीं होते. इस प्रशिक्षण में निहत्थे युद्ध कौशल, हथियारों के उपयोग, संतुलन, सहनशक्ति और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता पर विशेष जोर दिया जाता है. इसके साथ ही सैनिकों को कठिन परिस्थितियों में मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए भी तैयार किया जाता है.

लद्दाख में तैनाती के दौरान हासिल की उपलब्धि

फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने बताया कि लेफ्टिनेंट दीक्षा ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपने साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प से शानदार प्रदर्शन किया. इससे यह भी संकेत मिलता है कि वह लद्दाख क्षेत्र में तैनात रही हैं, जहां ऊंचाई और मौसम दोनों ही सैनिकों के लिए चुनौतीपूर्ण होते हैं.

आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर बना कोर्स

एएमएआर प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2023 में की गई थी. इसे भारतीय सेना के लिए एक आधुनिक और व्यवस्थित युद्ध प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है. इसमें पारंपरिक भारतीय मार्शल आर्ट की तकनीकों को अंतरराष्ट्रीय युद्ध कौशल के साथ जोड़ा गया है. प्रशिक्षण के दौरान सैनिकों को आक्रामक हमला, हथियार आधारित युद्ध, धारदार हथियारों से बचाव और आकस्मिक हथियारों के उपयोग जैसी स्थितियों से निपटने की तैयारी कराई जाती है. यह कोर्स पुराने निहत्थे युद्ध प्रशिक्षण की जगह तैयार किया गया है ताकि सैनिक वास्तविक युद्ध की जटिल परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें.

ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए खास तैयारी

इस प्रशिक्षण में विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाता है. ऐसे इलाकों में मौसम, ऑक्सीजन की कमी और कठिन भू-भाग सैनिकों की शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता दोनों की परीक्षा लेते हैं. इसलिए प्रशिक्षण के दौरान सैनिकों को ऐसी परिस्थितियों में भी प्रभावी तरीके से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है.

सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

हाल के वर्षों में भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका तेजी से मजबूत हुई है. अब पैदल सेना और बख्तरबंद कोर को छोड़कर सेना की लगभग सभी शाखाओं में महिला अधिकारी अपनी सेवाएं दे रही हैं. तोपखाना और सेना विमानन जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं में भी महिलाओं को अवसर मिल रहे हैं. इससे पहले वर्ष 2016 में महिलाओं ने लड़ाकू पायलट के रूप में भारतीय वायु सेना में शामिल होकर नया इतिहास बनाया था. लेफ्टिनेंट दीक्षा त्रिपाठी की उपलब्धि यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और साहस के बल पर महिलाएं भी सेना के सबसे कठिन प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा कर सकती हैं.

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