KVS Vs NVS: ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों का एडमिशन प्राइवेट स्कूल में करवाते है, यह सोचकर कि उन्हें सरकारी स्कूल से बेहतर शिक्षा मिलेगी. लेकिन देश में दो सरकारी स्कूल ऐसे भी है जहां एडमिशन पाने का सपना हर कोई देखता है. हम बात करेंगे केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय की जो इन दोनों सरकारी स्कूल में एडमिशन प्रोसेस काफी मुश्किल है, लेकिन फीस और पढ़ाई के मामले में ये टॉप स्कूल में आते है.
केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय देश के सबसे अच्छे स्कूलों में गिने जाते है. जहां केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय में कई समानताएं हैं, वहीं कुछ अंतर भी हैं जिनके बारे में सभी को पता होना चाहिए. केंद्रीय विद्यालय से जुड़ी सभी जानकारी KVS की ऑफिशियल वेबसाइट kvsangathan.nic.in पर मिल सकती है, और जवाहर नवोदय विद्यालय के बारे में जानकारी nvsadmission.co.in पर मिल सकती है.
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टॉप सरकारी स्कूलों में क्या समानता है?
अगर आप अपने बच्चे का एडमिशन देश के टॉप सरकारी स्कूल में से किसी एक में करवाना चाहते हैं, लेकिन कन्फ्यूज हैं, तो केंद्रीय विद्यालयों और जवाहर नवोदय विद्यालयों के बीच सभी एक जैसी बातों के बारे में जानते है.
- दोनों देश के टॉप सरकारी स्कूल है.
- दोनों को केंद्र सरकार चलाती है.
- दोनों CBSE बोर्ड से एफिलिएटेड है.
- दोनों में एडमिशन मिलना आसान नहीं है.
- दोनों में एडमिशन लेकर आप प्राइवेट स्कूलों के एक्स्ट्रा खर्च से बच सकते है.
केंद्रीय विद्यालयों-जवाहर नवोदय विद्यालयों में क्या अंतर है?
स्टूडेंट्स को एडमिशन से पहले केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय के बीच सभी बड़े अंतर भी पता होने चाहिए:
- भारत में 600 से ज़्यादा नवोदय विद्यालय है, जबकि केंद्रीय विद्यालयों की संख्या 1254 है.
- आप अपने होमटाउन के पास आसानी से केंद्रीय विद्यालय ढूंढ सकते हैं, जबकि नवोदय विद्यालय ढूंढना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.
- केंद्रीय विद्यालय की ब्रांच भारत और तीन दूसरे देशों में हैं, जबकि NVS सिर्फ़ भारत में है.
- केंद्रीय विद्यालय सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि NVS ऐसा नहीं करता है.
- केंद्रीय विद्यालयों का सिलेबस तय होता है, जिसका मतलब है कि लोकल रीति-रिवाजों पर कम ध्यान दिया जाता है.
- केंद्रीय विद्यालयों की ट्यूशन फीस सस्ती होती है, लेकिन ट्रांसपोर्टेशन, यूनिफॉर्म और किताबों जैसे एक्स्ट्रा खर्च से पढ़ाई का कुल खर्च बढ़ जाता है. दूसरी ओर नवोदय विद्यालय मुफ़्त पढ़ाई देते है. सीनियर क्लास के स्टूडेंट्स से कुछ फीस ली जाती है.
- केंद्रीय विद्यालयों के मुकाबले नवोदय विद्यालयों में एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज लिमिटेड होती है.
- सीटों की लिमिटेड संख्या होने की वजह से नवोदय विद्यालयों में माहौल ज़्यादा कॉम्पिटिटिव होता है. यह उन स्टूडेंट्स के लिए चैलेंजिंग हो सकता है जिन्हें स्ट्रेस की आदत नहीं होती है.
- दोनों ऑर्गनाइज़ेशन के टीचर्स को भी अलग-अलग फैसिलिटीज़ मिलती है. अगर पति-पत्नी केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों में काम करते हैं, तो वे एक ही स्टेट में म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए अप्लाई कर सकते है. लेकिन NVS में ऐसी कोई फैसिलिटी नहीं है.
- अगर काम के घंटों की बात करें, तो KVS में आपको दिन में 6-7 घंटे काम करना पड़ता है, जबकि NVS 24 घंटे काम करने वाला इंस्टीट्यूशन है.
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