India Semi-Final Qualification Scenario: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप के सुपर 8 चरण में भारत के लिए अब सिर्फ जीत काफी नहीं रह गई है. दक्षिण अफ्रीका से 76 रन की करारी हार ने टीम इंडिया के नेट रन रेट (NRR) को निगेटिव में पहुंचा दिया है. वहीं दूसरी तरफ SA ने WI को 9 विकेट से हरा दिया है. ऐसे में जिम्बाब्वे के खिलाफ अगला मुकाबला केवल दो अंक हासिल करने का नहीं, बल्कि बड़े अंतर से जीत दर्ज कर नेट रन रेट सुधारने का भी है. सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए भारत को जीत के साथ गणित भी साधना होगा.
नेट रन रेट क्यों बना बड़ी चुनौती?
दक्षिण अफ्रीका से मिली 76 रन की हार ने भारत को अंक तालिका में नुकसान पहुंचाने के साथ NRR पर भी भारी असर डाला. अब भारत को यह घाटा एक ही मैच में खत्म करना होगा. इसका मतलब है कि जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत का अंतर या लक्ष्य का पीछा करने की गति असाधारण होनी चाहिए, ताकि दो सुपर 8 मुकाबलों के बाद NRR पॉजिटिव में आ सके.
अगर भारत पहले बल्लेबाजी करे
पहले बल्लेबाजी की स्थिति में समीकरण अपेक्षाकृत स्पष्ट है. भारत को कम से कम 77 रन से जीत दर्ज करनी होगी. उदाहरण के तौर पर:
-अगर भारत 170 रन बनाता है, तो जिम्बाब्वे को 92 या उससे कम पर रोकना होगा.
-180 रन के स्कोर पर विरोधी टीम को 103 या उससे कम पर समेटना जरूरी होगा.
-190 रन बनाने पर जिम्बाब्वे को 113 या उससे कम पर रोकना होगा.
-200 रन के स्कोर की स्थिति में उन्हें 123 या उससे कम पर आउट करना होगा.
यह तरीका ज्यादा सीधा है, क्योंकि लक्ष्य स्पष्ट है—बड़ा स्कोर बनाओ और बड़े अंतर से जीत दर्ज करो. ऐसे में गेंदबाजों की भूमिका निर्णायक होगी.
अगर भारत को लक्ष्य का पीछा करना पड़े
दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने पर चुनौती और कठिन हो जाती है. केवल सामान्य गति से लक्ष्य हासिल करना काफी नहीं होगा. यदि भारत 16-17 ओवर में लक्ष्य हासिल करता है तो NRR में सुधार तो होगा, लेकिन निगेटिव से पॉजिटिव में जाने के लिए यह पर्याप्त नहीं माना जा रहा. तेज और आक्रामक बल्लेबाजी अनिवार्य होगी.
अनुमानित समीकरण इस प्रकार हैं:
-अगर जिम्बाब्वे 140 रन बनाता है, तो भारत को 141 रन लगभग 10.4 ओवर में बनाने होंगे.
-160 रन के लक्ष्य को लगभग 11.2 ओवर में हासिल करना होगा.
-180 रन के लक्ष्य को करीब 11.4 ओवर में पार करना पड़ेगा.
-200 रन के लक्ष्य को लगभग 12.1 ओवर में चेज करना होगा.
यानी रन रेट 12 से 14 के बीच बनाए रखना होगा, जो बड़े टूर्नामेंट के दबाव में आसान नहीं है.
इन समीकरणों से साफ है कि अगर भारत टॉस जीतता है तो पहले बल्लेबाजी करना अधिक फायदेमंद विकल्प हो सकता है. पहले बैटिंग में जीत का अंतर नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि लक्ष्य का पीछा करते समय दबाव दोगुना हो जाता है—एक तरफ जीत की जरूरत, दूसरी तरफ तेज गति से मैच खत्म करने की बाध्यता.
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