Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज, एक हिंदू तपस्वी और गुरु हैं, जो राधावल्लभ संप्रदाय को मानते हैं. प्रेमानंद जी महाराज अपनी भक्ति, सरल जीवन, और मधुर कथाओं के लिए लोगों में काफी प्रसिद्ध हैं. हर रोज लोग उनके कार्यक्रम में शामिल होते हैं जहां वह लोगों के सवालों के जवाब देते हैं.हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं. उनके प्रवचन, जो दिल को छू जाते हैं, ने उन्हें बच्चों और युवाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया है. प्रेमानंद जी महाराज नाम जप करने के लिए के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं और साफ मन से अपने काम को करें और सच्चा भाव रखें.
प्रेमानंद जी महाराज ने भक्त के सवाल पर बताया कि अगर कोई साधक व्रत मन को नियंत्रण करने के लिए करता है तो यह शरणागति में बाधा तो नहीं है,
प्रेमानंद जी महाराज का मानना है कि हम अपने मन को पवित्र करने के लिए संयम में लाते हैं, कि हमको यही नहीं माना, ऐसा नहीं करना, यह प्रारंभिक है, इसका कोई खास महत्व नहीं है. सात्विक भोजन भगवान को अर्पित करके, अल्पाहार किया जाए इससे हमारे मन को काबू होने पर सहयोग मिलता है. इस चक्कर में ना पड़े कि मुझे दूधाहार लेना है,फलहार लेना है, यह त्याह करना है वो त्याग करता है. हमें भवान की स्मृति में डूबने में सहायक क्या है, हमको यह देखना है. अगर हम अल्पाहार करके भगवान के भजन में मस्त हैं तो अल्पाहार करें, अगर भोजन की याद आती है तो रोटी खा लें. प्रधानता भजन की है, सात्विक भोजन, फल जो हो वो खाएं.
जीवन भर हम इस बात का ध्यान रखते हैं की हम इसके बिना रह सकते हैं या नहीं, लेकिन हम भगवान के चिंतन के बिना बिलकुल नहीं रह सकते हैं. उपवास करें, लेकिन हम अधिक धन वाली वस्तुओं का सेवन करेंगे, खाएगे, पिएंगे तो फिर भजन या नवीन साधना में उन्नति नहीं होगी. साधन परिपक्व हो जाता है तो फिर भगवान कहीं भी रखें, महलों में रखें या झोपड़ी में रखें यह उनका खेल हैं.
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