Roza Fasting Rules: मुसलमानों के लिए रमजान सबसे ज्यादा पवित्र महीना और अहम महीना माना जाता है. जो इस साल 18 फरवरी से शुरू होने वाले हैं. हालांकि, यह काफी हद तक चांद दिखने पर निर्भर करता है. जैसे ही रमज़ान शुरू होता है, मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह की इबादत करने और रोज़ा रखने में लग जाते हैं. इस्लाम में रमज़ान के दौरान रोज़ा रखने को लेकर कुछ नियम हैं जिनका पालन करना बेहद खास और जरूरी है. इन नियमों के अनुसार, कुछ लोगों के लिए रोज़ा रखना ज़रूरी है, जबकि कुछ लोगों को छूट दी गई है. चलिए जान लेते हैं कौन लोग रोजा छोड़ सकते हैं और कौन नहीं?
रोज़ा रखना किनके लिए ज़रूरी है
किनके लिए है फर्ज: रमज़ान में रोज़ा रखना मुसलमानों के लिए फर्ज़ यानी ज़रूरी बताया गया है.
स्वस्थ लोगों के लिए जरूरी: आपकी जानकारी के लिए बता दें जो जवान मर्द और औरतें हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं, उन्हें रोज़ा रखना चाहिए.
अल्लाह की इबादत: मुसलमानों के लिए रोज़ा रखना इसलिए भी बहुत जरूरी है क्योंकि रोज़ा अल्लाह की इबादत का एक अहम हिस्सा माना जाता है.
गुनाहों की माफी: रोज़ा रखना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि रोजा रखने से और दुआ करने से अल्लाह सारे गुनाह माफ कर देता है.
किन लोगों को रोज़ा रखने से छूट है
बीमार: जो लोग बीमार हैं और उन्हें बीमारी में दवाई खानी होती है तो ऐसे लोगों को रोज़ा रखने में छूट दी जाती है.
बुजुर्ग लोगों को छूट: आपकी जानकारी के लिए बता दें जो लोग बहुत बुज़ुर्ग हैं उन्हें भी रोज़ा रखने में छूट दी गई है.
मानसिक रूप से बीमार: साथ ही आपकी जानकारी के लिए बता दें जो लोग मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं उनके लिए भी रोज़ा रखना इतना जरूरी नहीं है.
छोटे बच्चे: साथ ही बता दें छोटे बच्चों के लिए भी रोज़ा रखना जरूरी नहीं है. उससे पहले रोज़ा रखने के तरीके को सीखना काफी अहम है.
गर्भवती महिलाएं: जो महिलाएं गर्भवती हैं अल्लाह ने उन्हें भी रोज़ा रखने की छूट दी है ताकि वो अपनी और आने वाले बच्चे की सेहत का ख्याल रख सकें.
पीरियड्स के दौरान: जो महिलाएं माहवारी यानी (पीरियड्स) के दौर में हैं तो अल्लाह ने उन्हें भी रोज़ा न रखने की छूट दी है.
यात्रा में छूट: जो लोग यात्रा में हों और रोज़ा रखना मुश्किल हो.