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Economic Survey India 2026: क्या होता है इकनोमिक सर्वे? कैसे बता देता है देश की अर्थव्यवस्था, बजट से पहले क्यों अपनाया जाता है ये फार्मूला;समझें

What is Economic Survey India 2026: इकोनॉमिक सर्वे एक तरह से अहम प्री-बजट दस्तावेज होता है. इसके जरिये ही देश की पूरे साल की आर्थिक स्थिति का पता चला है. इसके जरिये ही पूरे वर्ष के लिए विकास की रफ्तार और आने वाले समय के छोटे व मध्यम अवधि के आर्थिक अनुमान बताए जाते हैं.

By: Heena Khan | Last Updated: January 29, 2026 3:00:53 PM IST



Economic Survey India 2026: बजट सत्र 2026 की शुरुआत हो गई है. एक फरवरी, 2026 को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा. इसके लिए तैयारी पूरी हो चुकी है. इससे पहले गुरुवार (29 जनवरी, 2026) को आर्थिक सर्वेक्षण 2026 (Economic Survey 2026) पेश किया गया. केंद्र में सत्तासीन सरकार प्रत्येक वर्ष बजट पेश करने से पहले आर्थिक सर्वेक्षण कराती है. इसका मकसद वित्त वर्ष में योजनाओं के लिए क्रियान्वयन के लिए फंड का हिसाब किताब लगाना है. आसान भाषा में समझें तो  इकोनॉमिक सर्वे एक तरह से अहम प्री-बजट दस्तावेज होता है. इसके जरिये ही देश की पूरे साल की आर्थिक स्थिति का पता चला है. इसके जरिये ही पूरे वर्ष के लिए विकास की रफ्तार और आने वाले समय के छोटे व मध्यम अवधि के आर्थिक अनुमान बताए जाते हैं.

इस सर्वे से क्या होगा क्लियर ? (Why Economic Survey is Conducted ?)

वहीं आपके लिए ये भी जानना बेहद जरूरी है कि केंद्र सरकार गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 (इकोनॉमिक सर्वे) पेश करने जा रही हैं. खास बात ये है कि यह सर्वे 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले पेश किया जाएगा. इससे यह बात क्लियर होगी कि दुनिया में चल रही अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था की हालत कैसी है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इकोनॉमिक सर्वे पेश करेंगी. वहीं अब पूरे देश की नजरें चालू वित्त वर्ष 2025-26 और आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान पर टिकी हुई हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इकोनॉमिक सर्वे क्या होता है और इसे करने के पीछे का कारण क्या है? आज हम आपको यही बताने वाले हैं.

जानें क्या है इकोनॉमिक सर्वे (What is Economic Survey?)

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इकोनॉमिक सर्वे एक महत्वपूर्ण प्री-बजट दस्तावेज होता है, जिसमें देश की पूरे साल की आर्थिक स्थिति, विकास की रफ्तार और आने वाले समय के छोटे और मध्यम अवधि के आर्थिक अनुमान बताए जाते हैं. साथ ही बताते चलें कि इकोनॉमिक सर्वे को आमतौर पर सरकार की पॉलिसी की दिशा का इंडीकेटर भी कहा जाता है. ये एक ऐसे महत्वपूर्ण रेफरेंस पॉइंट का काम करता है, जो उन प्राथमिकताओं और बड़ी पॉलिसी अप्रोच का संकेत देता है जो 2026-27 के यूनियन बजट को आकार दे सकते हैं.

आर्थिक सर्वेक्षण सरकार की एक ऐसी रिपोर्ट है, जिसमें देश की आर्थिक स्थिति, चुनौतियों और आगे की दिशा के बारे में विस्‍तार से आकलन किया गया होता है. इसमें विकास के संकेतकों, महंगाई के अनुमान और देश की नौकरियों, व्यापार और वित्तीय से जुड़ी सभी जानकारी शामिल होती है. आपकी जानकारी के लिए ये भी बता दें कि जब भी देश का बजट आने वाला होता है, उससे ठीक एक दिन पहले संसद में एक अहम डॉक्यूमेंट सभी के सामने रखा जाता है, जिसे हम इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) कहते हैं. इसके अलावा इसे आर्थिक समीक्षा भी कहा जाता है.

बजट से पहले क्यों रखा जाता है इकनोमिक सर्वे ? 

अब आप सोच रहे होंगे कि बजट से पहले ही इकनोमिक सर्वे क्यों रखा जाता है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बजट और इकोनॉमिक सर्वे का रिश्ता एक अनोखा रिश्ता है. उदाहरण के लिए जैसे फिल्म से पहले उसका ट्रेलर रिलीज होना यह बताता है कि सरकार ने पिछले बजट में जो वायदे किए थे, वे कितने पूरे हुए. इसमें अगले साल के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान भी लगाया जाता है, जिससे निवेशकों और आम जनता को संकेत मिलता है कि देश के विकास की स्पीड क्या है और आने वाले समय में क्या होगी. खास बात तो ये है कि ये मात्र सिर्फ एक डेटा ही नहीं देता, बल्कि सरकार को सुझाव भी देता है कि किस सेक्टर में किस गति से काम करना है. और ऐसा कौन सा सेक्टर है जिसे बूस्ट की जरूरत है.

इकोनॉमिक सर्वे कैसे किया जाता है ? (How Economic Survey is Conducted?)

आपकी जानकारी के लिए ये भी बता दें कि इकोनॉमिक सर्वे भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आर्थिक कार्य विभाग द्वारा तैयार किया जाता है, जिसकी अगुवाई मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor) करते हैं. आपको बता दें, इस अहम सर्वे के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रालयों, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया, नीति आयोग, सांख्यिकी विभाग, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और निजी क्षेत्र से जुड़े आर्थिक आंकड़े इखट्टे किए जाते हैं. इनमें GDP, महंगाई, रोजगार, कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, निर्यात-आयात, बैंकिंग और सामाजिक योजनाओं से जुड़े डेटा शामिल होते हैं. इन आंकड़ों का गहन विश्लेषण कर देश की आर्थिक स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं के बारे में पता लगाया जाता है. 

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