Morarji Desai: वह अंधेरी रात और जोरहाट का आसमान प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई इंडियन एयर फोर्स के VVIP विमान, पुष्पक (Tu-124) से असम के जोरहाट जा रहे थे. मौसम बहुत खराब था, घना अंधेरा था, और विमान को लैंडिंग के लिए रनवे नहीं मिल रहा था. फ्यूल बहुत कम बचा था. जोरहाट के पास आसमान में मंडराते हुए विमान के पास बहुत कम ऑप्शन बचे थे. पायलट समझ गए थे कि क्रैश लैंडिंग तय है.
विमान को बहादुर विंग कमांडर क्लेरेंस डी’लिमा उड़ा रहे थे. जब उन्हें एहसास हुआ कि रनवे तक पहुंचना नामुमकिन है, तो उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जो इतिहास में दर्ज हो गया. उन्होंने नीचे अंधेरे में देखा और लैंडिंग के लिए एक गीला धान का खेत चुना. विंग कमांडर डी’लिमा ने जानबूझकर “बेली लैंडिंग” चुनी, यानी लैंडिंग गियर का इस्तेमाल किए बिना विमान को उसके निचले हिस्से के बल उतारा. उन्होंने लैंडिंग को इस तरह से मैनेज किया कि सबसे ज़्यादा असर विमान के अगले हिस्से, यानी कॉकपिट पर पड़े. उनका मकसद साफ था. पीछे के केबिन में बैठे प्रधानमंत्री सुरक्षित रहने चाहिए, भले ही कॉकपिट पूरी तरह से बर्बाद हो जाए.
1977 :: Crash Landing of IAF’s Tupolev-124 Plane With PM Morarji Desai On Board In Jorhat, Assam
5 Crew Members Were Killed pic.twitter.com/ll5or9Vp04
— indianhistorypics (@IndiaHistorypic) January 28, 2026
वह चमत्कार जिसने दुनिया को हैरान कर दिया
विमान जमीन से टकराया, और जैसा कि पायलटों ने सोचा था, कॉकपिट पूरी तरह से कुचल गया. इस हादसे में विंग कमांडर डी’लिमा और पांच अन्य क्रू मेंबर की मौके पर ही मौत हो गई. उन्होंने देश के प्रधानमंत्री को बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी. जब बचाव दल पहुंचा, तो वे मलबे से मोरारजी देसाई को बाहर निकलते देखकर हैरान रह गए. उन्हें सिर्फ़ होंठ पर मामूली चोट लगी थी. 81 साल की उम्र में इतने भयानक हादसे में बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं था. इसे भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा “चमत्कारिक बचाव” माना जाता है.
आज ऐसा कोई मौका नहीं
आज जब हम अजित पवार के हादसे को देखते हैं, तो 1977 की वह घटना याद आती है. मोरारजी देसाई के पास पुराने जमाने का रूसी विमान था, फिर भी वह बच गए क्योंकि पायलटों ने अपनी जान जोखिम में डाली, और शायद किस्मत भी उनके साथ थी. लेकिन आज आधुनिक टेक्नोलॉजी और सुरक्षा उपायों के बावजूद बारामती में अजित पवार के विमान के साथ जो हुआ, उसने किसी भी मौके की गुंजाइश नहीं छोड़ी है.