Islamic Polygamy Law: हर तरफ ये सवाल खड़ा होता है कि इस्लाम में, एक आदमी को चार लड़कियों से शादी करने की इजाजत क्यों दी गई है. इस प्रथा के कारण अक्सर मुसलमानों को कई तरह की आलोचनाओं से होकर गुजरना पड़ता है. लेकिन, बता दें कि इस्लाम ने बहुविवाह को बढ़ावा देने के लिए चार शादियों का प्रावधान पेश नहीं किया, बल्कि सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए ये प्रथा बनाई गई थी. ये भी सच है कि, इस्लाम एक से ज़्यादा पत्नियों से शादी करने के लिए कई शर्तें लगाता है, जिन्हें पूरा करना बेहद ज़रूरी है. आपकी जानकारी के लिए बता दें, इस्लाम में चार शादियों के प्रावधान को कई समस्याओं के समाधान के तौर पर भी देखा जाता है. आज हम इस्लाम में चार शादियों की शर्तों, उन सामाजिक बुराइयों और समस्याओं के बारे में जानकारी देंगे जिन्हें यह प्रावधान दूर करने का लक्ष्य रखता है.
4 शादियों का सामाजिक कारण
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुराने समय में, शादी को लेकर कोई सख्त कानून नहीं थे. इस दौरान लोग अनलिमिटेड बार शादी करते थे. इस प्रथा को रोकने के लिए, इस्लाम ने ज़्यादा से ज़्यादा चार शादियों की इजाज़त दी. इसका मतलब है कि एक मुस्लिम पुरुष अनलिमिटेड महिलाओं से शादी नहीं कर सकता; वो एक समय में चार से ज़्यादा पत्नियां नहीं रख सकता. जब इस्लाम ने यह प्रावधान पेश किया, तो यह एक क्रांतिकारी फैसले से कम नहीं था. इस्लाम में चार शादियों की इजाज़त देने का पहला फ़ायदा यह है कि यह अनलिमिटेड शादियों को रोकता है, क्योंकि एक आदमी अनलिमिटेड औरतों से शादी करके उन सबके साथ बराबरी का बर्ताव नहीं कर सकता.
विधवा महिलाओं को सम्मान देना
अक्सर ऐसा होता है कि हम समाज में देखते हैं कि पुरुष विधवा महिलाओं से शादी करना पसंद नहीं करते. भारत सहित कई देशों में, विधवा से शादी करना बुरा माना जाता था. इतना ही नहीं, विधवा महिला को अक्सर कुछ समय बाद अपने ही परिवार से उपेक्षा का सामना करना पड़ता था. लेकिन, पैगंबर मुहम्मद ने खुद विधवाओं से शादी करके इस प्रथा को बढ़ावा दिया. इसलिए, इस्लाम एक पुरुष को एक से ज़्यादा महिलाओं से शादी करने की इजाज़त देता है, ताकि वो विधवा महिलाओं से शादी कर उनका सहारा बन सकें और उनको सम्मान दे सके.
Kolkata Fire Incident: काल बनी आग! कोलकाता अग्निकांड में 7 मजबूरों की मिलीं लाशें, 21 अब भी लापता
युद्ध बनाएं बहुविवाह का कारण
जैसा की आप सभी जानते हैं कि दुनियाभर में युद्ध पहले बेहद आम बात थी. इन युद्धों में, ज़्यादातर पुरुष मारे जाते हैं क्योंकि सशस्त्र बलों में पुरुषों की संख्या ज़्यादा होती है. लेकिनआधुनिक युग में महिलाओं को भी सशस्त्र बलों में शामिल किया जा रहा है, लेकिन उनकी संख्या सीमित है. यह भी एक सच्चाई है. यह तब साफ़ हो जाता है जब हम अलग-अलग देशों के सशस्त्र बलों में भर्ती और तैनात पुरुषों और महिलाओं के आँकड़े देखते हैं, जिससे पता चलता है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज़्यादा प्राथमिकता दी जाती है.
ऐसे में युद्ध में बड़ी संख्या में पुरुष मारे जाते हैं, जिससे उनकी पत्नियां विधवा हो जाती हैं और बच्चे अनाथ हो जाते हैं. इन विधवाओं और अनाथों की देखभाल के लिए, इस्लाम मुस्लिम पुरुषों को एक से ज़्यादा महिलाओं से शादी करने की इजाज़त देता है, ताकि इन महिलाओं और बच्चों की देखभाल हो सके, बच्चे फिर से पिता का प्यार पा सकें, और विधवाएँ एक नया पति पाकर परिवार के ढाँचे में अपनी ज़िंदगी फिर से शुरू कर सकें.