Iran Portest: ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन की आग अब इस्लाम की सबसे पवित्र इमारतों तक पहुंच गई हैं. जानकारी के मुताबिक, ईरान की कई मस्जिदों में आग लगा दी गई, इतना ही नहीं बल्कि ईरान के मदरसों को जला दिया गया. इस दौरान खामेनेई सरकार बेबस होकर देखती रही, अपराधियों को दंगाई और आतंकवादी बताती रही, लेकिन उनकी पहचान नहीं कर पाई. एक मुस्लिम-बहुल देश में जहाँ लोग अपने धर्म के लिए जान देने को तैयार रहते हैं, वहाँ कोई “अल्लाह के घर” में आग कैसे लगा सकता है? ये सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है.
किसने जलाईं मस्जिदें ?
मीडिया रपोर्टस के मुताबिक, जैसे ही ईरान की मस्जिदों में आग लगने की खबर सामने आई, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई से लेकर राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन तक सभी ने एक साथ सिर्फ और सिर्फ विदेशी दुश्मनों और दंगाइयों को दोषी ठहराया. वहीं फिर देश को संबोधित करते हुए खामेनेई ने एक चौंकाने वाले रिपोर्ट पेश की. उन्होंने दावा किया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान 250 मस्जिदें शहीद कर दी गई हैं. उन्होंने इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को बुरा और प्रशिक्षित कलाकार बताया जो कथित तौर पर अनजान प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे थे. खमेनेई ने साफ कहा कि ये प्रदर्शनकारी नहीं हैं, बल्कि भाड़े के सैनिक हैं जिनका मकसद घरों, दफ़्तरों और धार्मिक स्थलों पर हमला करना है.
For you Ektarfa Janum Pyjama and Paapiya Amanatullah Khan,
Al-Rasool Mosque, being burned by the Islamists in Tehran, Iran as they got fed up with the Iranian regime of Khameini.Tum karo toh tumhara Haq,
Hum yaha illegal encroachment demolish karein toh “What The F*€k”??? pic.twitter.com/kezCgEFzpf— Dr Poornima 🇮🇳 (@PoornimaNimo) January 10, 2026
जाने क्या बोले राष्ट्रपति ?
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी अपने टेलीविज़न संबोधन में इस बात को बताया. उन्होंने कहा कि मस्जिदों में आग लगाने वाले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले ट्रेंड आतंकवादी हैं. सरकारी मीडिया ने तेहरान के सादेघिएह स्क्वायर में जली हुई इमाम सादेघ मस्जिद और अबू ज़र मस्जिद की तस्वीरें जारी कीं, और सीधे तौर पर “मोसाद (इज़राइली खुफिया एजेंसी) के भाड़े के सैनिकों” पर आरोप लगाया. सरकार का तर्क सीधा है: चूंकि कोई भी ईरानी मुसलमान मस्जिद को नहीं जलाएगा, इसलिए यह ज़रूर किसी विदेशी दुश्मन का काम है.