Purnea Violence: बिहार के पूर्णिया की एक ऐसी कहानी जिसे जानने के बाद आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। ये कहानी उस परिवार की है जिसे हाल ही में जिंदा जला दिया गया। बिहार के पूर्णिया में एक रजीगंज पंचायत है। पूर्णियां के टेटगाम गांव में कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद वहां मातमी सन्नाटा छा गया है। दरअसल, यहाँ एक परिवार के लगभग 5 लोगों को जिंदा जलाकर भस्म कर दिया गया। इस वारदात के बाद पूरे गाँव में दहशत है, जिसके बाद कई घरों में ताला लग गया और लोग मकान छोड़कर चले गए। वहीँ माहौल इतना तनावपूर्ण है कि पुलिस गलियों में गश्त कर रही है। वहीँ अब तक पुलिस इस मामले में लगभग 23 नामजद और 150 अज्ञात लोगों को हिरासत में ले चुकी है। वहीँ कहा जा रहा है कि ये आकड़ा बढ़ सकता है।
अंधविश्वास बना मौत का कारण
अंधविश्वास के चलते गाँव वालों ने पूरे परिवार को भस्म कर दिया। जिन लोगों की हत्या की गई है उनमे बाबूलाल उरांव (पति), सीता देवी (पत्नी), मो कातो (मां), रानी देवी (बहू) और मनजीत (बेटा) शामिल हैं। जिन्हे इस दौरान जिंदा जला दिया गया है। वहीँ इस दौरान पुलिस की टीम जब घटनास्थल पर पहुंची तो वहां पर सिर्फ जले हुए कपड़े पड़े थे। इतना ही नहीं वहां पर मकई के डंठल रख दिए गए थे। इतना ही नहीं बल्कि इस दौरान जली हुईं लाशों को तालाब में फेंक दिया गया था। तालाब जलकुंभी से भरा हुआ था। लाशें जलकुंभी में ही दबी हुई पुलिस को मिलीं।
जानिए पूरा मामला
दरअसल, टेटगामा वार्ड-10 में रामदेव उरांव का परिवार रहता है। किसी वजह से रामदेव का बेटा बीमार था। परिवार ने बेटे की झाड़-फूंक भी कराई थी, लेकिन उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई और उसकी मौत हो गई। रामदेव को गांव के ही बाबूलाल उरांव और उसके परिवार पर काला जादू और टोना करने का शक था। उन्होंने आरोप लगाया कि बाबूलाल के परिवार ने काला जादू करके उनके बेटे की हत्या की है। परिवार की महिलाओं पर डायन होने का आरोप लगाया गया था।
बेरहमी से की हत्या
रविवार रात 9 बजे गांव में पंचायत हुई। पंचायत में आसपास के तीन गांवों के करीब 300 लोग शामिल हुए। पंचायत दो घंटे तक चली। पंचों ने सर्वसम्मति से बाबूलाल और उसके परिवार को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद रात करीब 1 बजे पांचों सदस्यों को उनके घर से करीब 50 फीट की दूरी पर ले जाया गया। पहले उनकी बेरहमी से पिटाई की गई, फिर रस्सियों से बांध दिया गया। इसके बाद उन्हें जिंदा जला दिया गया। घटना के वक्त वहां सैकड़ों लोग मौजूद थे। परिवार रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन किसी का दिल नहीं पिघला। भीड़ में से कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। वे रोते रहे, चीखते रहे, मिन्नतें करते रहे… हर कोई उन्हें जिंदा जलते देखता रहा।