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बर्बाद हो जाएगा अमेरिका…,टैरिफ हटाने के कोर्ट के फैसले पर भड़क गए ट्रंप, 14 अक्टूबर को मिल सकती है खुशखबरी

US President Donald Trump:अमेरिका की एक अपील अदालत ने 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति ट्रम्प के अधिकांश व्यापक टैरिफ अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम के तहत उनके अधिकार से परे हैं, हालांकि अपील की अनुमति देने के लिए प्रवर्तन को 14 अक्टूबर तक रोक दिया गया है।

Published by Shubahm Srivastava

Trump Tariff:अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत समेत कई देशों पर भयंकर टैरिफ लगा दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है। वहीं अब अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने व्यापक टैरिफ कार्यक्रम का बचाव करना पड़ा है। क्योंकि अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत ने फैसला दिया है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए ज़्यादातर टैरिफ (आयात पर लगने वाले शुल्क) कानून के खिलाफ हैं। अदालत ने कहा कि “इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट” (IEEPA) का इस्तेमाल इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। यह फैसला 7 जजों के पक्ष और 4 जजों के विरोध में आया। हालांकि, अदालत ने कहा है कि 14 अक्टूबर तक यह शुल्क लागू रहेंगे, ताकि सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके।

ट्रंप ने क्या कहा ?

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि “7 से 4 की राय में, जजों के एक कट्टरपंथी वामपंथी समूह ने इसकी परवाह नहीं की, लेकिन ओबामा द्वारा नियुक्त एक डेमोक्रेट ने वास्तव में हमारे देश को बचाने के लिए मतदान किया। मैं उनके साहस के लिए उनका धन्यवाद करना चाहता हूँ! वह अमेरिका से प्यार करते हैं और उसका सम्मान करते हैं,”

इससे पहले उन्होंने लिखा था, “सभी टैरिफ अभी भी लागू हैं! आज एक अत्यधिक पक्षपातपूर्ण अपील अदालत ने गलत तरीके से कहा कि हमारे टैरिफ हटा दिए जाने चाहिए, लेकिन वे जानते हैं कि अंत में संयुक्त राज्य अमेरिका की ही जीत होगी। अगर ये टैरिफ कभी हट गए, तो यह देश के लिए एक बड़ी आपदा होगी। यह हमें आर्थिक रूप से कमज़ोर बना देगा, और हमें मज़बूत होना होगा।”

अदालत ने क्या कहा और इसका मतलब क्या है

अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति को इतने बड़े स्तर पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। संविधान के अनुसार टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस को है, राष्ट्रपति को नहीं। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन का यह तर्क कमजोर हो गया है कि इमरजेंसी पावर के तहत वो इतने बड़े टैरिफ लागू कर सकते हैं।

कौन-से टैरिफ हट सकते हैं और कौन से अभी भी लागू हैं?

इस केस में दो मुख्य तरह के टैरिफ की बात की गई है पहला रेसिप्रोकल” टैरिफ है जिसका एलान अप्रैल में किया गया था। वहीं दूसरा टैरिफ चीन, कनाडा और मैक्सिको पर लगाए गए टैरिफ(February पैकेज) है जिसका ऐलान फरवरी में किया गया था। ये दोनों मिलकर अमेरिका के लगभग 69% आयात पर असर डालते हैं। अगर अदालत का फैसला कायम रहा, तो यह दायरा 16% तक घट जाएगा।

कौन से टैरिफ अभी भी लागू रहेंगे?

बता दें कि स्टील और एल्युमिनियम पर लगे टैरिफ (जो सेक्टर-विशेष हैं) अभी भी लागू रहेंगे। वहीं वो टैरिफ जो  “Section 232” के तहत आते हैं और इस केस का हिस्सा नहीं हैं।

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सरकार का अगला कदम और सहयोगियों की प्रतिक्रिया

ट्रंप के ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो ने अदालत के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि यह जज नहीं, बल्कि काले चोगे में नेता हैं। अगर यह फैसला कायम रहा, तो अमेरिका का अंत हो जाएगा। सरकार अब यह सोच रही है कि सेक्टर-विशेष टैरिफ को और बढ़ाया जाए, ताकि अदालत के फैसले का असर कम किया जा सके।

उद्योग और कानूनी विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं

कुछ वकीलों का मानना है कि Section 232 वाले टैरिफ कानूनी तौर पर मजबूत हैं और उन्हें हटाना मुश्किल होगा। एक वकील ने CNBC को बतायाये टैरिफ ट्रंप की रणनीति का अहम हिस्सा हैं और शायद अगले राष्ट्रपति के समय भी जारी रहेंगे।”

केस किसने दायर किया और आगे क्या होगा?

यह केस डेमोक्रेटिक राज्यों और छोटे व्यापारियों ने मिलकर दायर किया था।उन्होंने कहा कि ट्रंप सरकार ने IEEPA का गलत इस्तेमाल करके अनुचित टैरिफ लगा दिए।

बता दें कि अब सरकार के पास दो रास्ते हैं पहला ये कि वो 14 अक्टूबर से पहले सुप्रीम कोर्ट में अपील करें। वहीं सरकार अगर ऐसा नही करती है तो सुप्रीम कोर्ट ने केस नहीं सुना या फैसले को बरकरार रखा, तो ज़्यादातर टैरिफ हट जाएंगे।

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इस फैसले का वैश्विक असर

इन टैरिफ्स और मुकदमों की वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बदलाव आया है।कुछ देश जैसे UK, जापान और EU ने अमेरिका से नए समझौते किए हैं। जबकि भारत जैसे देशों पर टैरिफ और बढ़ा दिए गए हैं। कुछ मामलों में 50% तक खासकर रूस से तेल खरीदने की वजह से। फिलहाल, कंपनियों को उन्हीं टैरिफ के हिसाब से काम करना होगा जो अभी लागू हैं, जब तक कोर्ट कोई अंतिम फैसला नहीं देता।

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