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अमेरिका का U-TURN, आखिर भारत से क्यों डरे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ?

US on India Relation: अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी लगातार नई उंचाइयों को छू रही है। अमेरिका ने भारत के साथ अपने रिश्ते को सिर्फ़ रणनीतिक ही नहीं देखा है।

Published by Divyanshi Singh

US: हर तरफ शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक को लेकर चर्चा हो रहा है।  यह बैठक कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। इस बैठक में चीन, भारत (India) और रूस (russia) तीनों देश के प्रमुख एक ही मंच पर नज़र आए। दूसरी ओर अमेरिका (US) को ये देखा नहीं जा रहा है। अब अमेरिका ने भारत के साथ अपने संबंधों को लेकर कुछ ऐसा कहा जिसे देख हर कोई हैरान रह गया। बता दें कि अमेरिका ने भारत के साथ अपने संबंधों को 21वीं सदी की पहचान बताया है। यह इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति लागातार भारत के खिलाफ कड़े कदम उठा रहे हैं। 

‘नई उंचाइयों को छू रही है दोनों देशों की दोस्ती’

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी लगातार नई उंचाइयों को छू रही है। अमेरिका ने भारत के साथ अपने रिश्ते को सिर्फ़ रणनीतिक ही नहीं देखा है। उन्होने इसको लोगों के बीच गहरी दोस्ती पर आधारित बताया है। सोशल मीडिया पर अमेरिकी दूतावास ने #USIndiaFWDforOurPeople हैशटैग के साथ रक्षा सहयोग, नवाचार और द्विपक्षीय संबंधों को भविष्य की दिशा देने वाला बताया।

भारत पर 50 % टैरिफ

जहां अमेरिकी विदेश विभाग दोनों देशों के बीच के संबंध को 21वीं सदी की पहचान बता रहा है। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप लागातार भारत पर आरोप लगा रहे हैं। ट्रंप ने भारत विरोधी कई कदम उठाए जिसके बाद से दोनों देशों के संबध तनाव की ओर बढ़ रहे हैं। ट्रंप ने सबसे पहले भारत पर 50 % का टैरिफ लगाया। जिसकी वजह उन्होने रूस से तेल खरीदना बताया। वहीं ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो पिछले एक हफ़्ते में कई बार भारत पर सीधा हमला बोल चुके हैं।

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भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं ट्रंप के सलाहकार

ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो (Peter Navarro) पीछले हफ़्ते कहा था कि रूस-यूक्रेन (russia-ukraine) संघर्ष असल में “मोदी का युद्ध” है। उनका आरोप है कि भारत रूस से सस्ते दामों पर कच्चा तेल ख़रीद रहा है, उसे रिफ़ाइन करके ऊँची क़ीमत पर बेच रहा है और इस प्रक्रिया में पुतिन की युद्ध मशीन को आर्थिक मदद मिल रही है। 29 अगस्त को उन्होंने एक कदम और आगे बढ़कर भारत को “क्रेमलिन की मनी लॉन्ड्रिंग मशीन” कह दिया।

नवारो ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय रिफ़ाइनरियां आम लोगों की क़ीमत पर मुनाफ़ा कमा रही हैं और इससे रूस को बल मिल रहा है। उनके अनुसार, अमेरिका का टैरिफ़ इस मदद को रोकने का एक ज़रिया है। इन बयानों से साफ़ है कि अमेरिका में भारत को लेकर मतभेदों की दोहरी तस्वीर उभर रही है। एक ओर आधिकारिक स्तर पर मजबूत संबंधों का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप खेमे से बढ़ती नाराजगी भी सामने आ रही है।

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