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ट्रंप के टैरिफ के बाद पहली बार एक साथ सामने आए तीन सुपरपावर! तस्वीर देख दंग रह गए अमेरिकी

pm modi in china: प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच सुबह 10 बजे द्विपक्षीय वार्ता होगी। पुतिन के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब अमेरिका ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिया था, तब भी भारत ने मित्रता दिखाते हुए रूस से तेल खरीदना जारी रखा था।

Published by Divyanshi Singh

SCO Summit 2025: चीन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन का आज दूसरा दिन है। एससीओ शिखर सम्मेलन में आज नेताओं की मुलाकात हो रही है। बैठक के बाद, नेता संबोधन भी देंगे। शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी, चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात हुई। तीनों नेता एक साथ आए। अब तीनों नेताओं के बीच बैठक हो रही है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। इसी के चलते अमेरिका की भी पीएम मोदी और पुतिन की इस मुलाकात पर नज़र है। इस दौरान, पीएम मोदी अब एससीओ बैठक को संबोधित कर रहे हैं।

एक साथ आए तीनों नेता

एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात हुई। तीनों नेता एक साथ आए। इसके बाद अब तीनों के बीच बैठक हो रही है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल X पर नेताओं के साथ बैठक की तस्वीरें पोस्ट कीं। इस बैठक के बारे में पीएम ने कहा, तियानजिन में बातचीत चल रही है। एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी के साथ विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

द्विपक्षीय वार्ता

प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच सुबह 10 बजे द्विपक्षीय वार्ता होगी। पुतिन के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब अमेरिका ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिया था, तब भी भारत ने मित्रता दिखाते हुए रूस से तेल खरीदना जारी रखा था। ऐसे में, जब ट्रंप के टैरिफ युद्ध के बाद पहली बार प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन मिल रहे हैं, तो ट्रंप की धड़कनें बढ़ना तय है। इसके अलावा, यह भी देखना होगा कि रूस और चीन एससीओ के मंच से ट्रंप की धमकियों का कैसे जवाब देंगे।

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ट्रंप को लग सकता है झटका

ट्रंप की टैरिफ तानाशाही और तेल को लेकर कूटनीतिक युद्ध के तीन साल बाद, महाशक्तियाँ पहली बार एक मंच पर एक साथ हैं। एक रूस है। अमेरिका ने उसके तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर उसे आर्थिक रूप से चोट पहुँचाने की कोशिश की थी। दूसरी तरफ चीन और भारत हैं। जो युद्ध के बाद रूस से सबसे ज़्यादा तेल खरीद रहे हैं। ऐसे में, जब पुतिन, प्रधानमंत्री मोदी और जिनपिंग एससीओ के मंच से एक साथ अपने विचार रखेंगे। तो निश्चित रूप से डोनाल्ड ट्रंप इसे बहुत ध्यान से सुन रहे होंगे।

ऐसे में तीनों देश तेल को लेकर किसी नतीजे पर पहुँच सकते हैं। भारत ने साफ़ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। वह रूस से तेल ख़रीदता रहेगा और अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने रूस से तेल ख़रीदकर एक बड़े वैश्विक संकट को टाल दिया है।

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