Categories: विदेश

Prison Library System: किताब पढ़ो और जेल से आज़ाद हो जाओ! इस देश ने आखिर क्यों बनाया ऐसा नियम? दुनिया हैरान

दुनिया की अनोखी जेल! बोलीविया में कैदियों को किताबें पढ़ने पर मिलती है जल्दी रिहाई.जानिए इस खास रूल और नई पहल की पूरी कहानी.

Published by Shivani Singh

क्या किसी जेल में किताबें पढ़ने से सज़ा कम हो सकती है? जी हाँ! दुनिया में एक ऐसा देश है, जहाँ जितनी ज़्यादा किताबें कैदी पढ़ते हैं, उतनी जल्दी उन्हें जेल से आज़ादी मिल जाती है. सोचिए, अप राध की सज़ा काटते हुए अगर किसी की ज़िंदगी किताबों के ज़रिए बदल जाए, तो इससे बेहतर सुधार का रास्ता और क्या हो सकता है?

दरअसल वेस्ट सेंट्रल साउथ अमेरिका का देश बोलीविया एक नए एक्सपेरिमेंट के लिए चर्चा में है. सबसे ज़्यादा किताबें पढ़ने वाले कैदियों को उनकी सज़ा पूरी होने से पहले ही रिहा किया जा रहा है. वैसे तो सभी अमेरिकी जेलों में अच्छी लाइब्रेरी हैं, लेकिन बोलीविया में कैदियों को इसका फ़ायदा मिल रहा है, और किताबें पढ़ने से उनकी ज़िंदगी में भी बदलाव आ रहा है. जेलों के अंदर कैदियों के हाथों में अक्सर किताबें देखी जाती हैं। हाल ही में ब्राज़ील भी इस पहल के लिए चर्चा में आया था.

इस वजह से बना यह नियम

बोलीविया ने अपने पड़ोसी देश से सीख लेते हुए अपनी जेलों में यह सिस्टम शुरू किया था. ब्राज़ील के जेल प्रोग्राम की तरह ही इसे बोलीविया में भी लागू किया गया था. इस पहल से कैदियों के व्यवहार में भी साफ़ बदलाव दिख रहा है. किताबें पढ़ने के बाद कैदियों को एक रीडिंग टेस्ट देना होता है. सरकार का मानना ​​है कि इससे उनकी ज़िंदगी को एक नई दिशा मिलेगी और वे दोबारा क्राइम करने से बचेंगे.

इजरायल-हमास युद्ध के बीच किससे और क्यों माफी मांगने लगे बेंजामिन नेतन्याहू? अब नहीं बचा पाएंगे PM पद!

Related Post

अमेरिका में पहली जेल लाइब्रेरी 1790 में बनी थी

जब जेलों में लाइब्रेरी के इतिहास की बात आती है, तो यूनाइटेड स्टेट्स टॉप देशों में आता है. अमेरिका में पहली जेल लाइब्रेरी 1790 में बनी थी. हालांकि, ब्रिटिश राज के दौरान, भारतीय जेलों में बंद क्रांतिकारी भी किताबें मंगवाकर पढ़ते थे. उन्होंने खूब लिखा भी. महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं ने जेल में कई किताबें पढ़ीं और लिखीं.

अमेरिका की सभी जेलों में लाइब्रेरी हैं. कैदी वहीं से किताबें लेते हैं. शुरुआत में, कैदियों को सिर्फ़ धार्मिक किताबें पढ़ने की इजाज़त थी. बाद में, लाइब्रेरी में हर तरह की किताबें जोड़ी गईं.

तिहाड़ हर जेल में एक लाइब्रेरी है.

भारत की राजधानी दिल्ली में मौजूद तिहाड़ जेल में आठ जेल हैं, और हर जेल में एक लाइब्रेरी है. कैदियों को पढ़ने के लिए चार घंटे दिए जाते हैं। यहां की लाइब्रेरी में गांधीजी की ऑटोबायोग्राफी से लेकर स्वामी विवेकानंद और फिलॉसफी से जुड़ी किताबों की डिमांड रहती है.

मुसलमानों को दफनाने के लिए नहीं मिलेगी जमीन, जापान सरकार के एक फैसले से दुनियाभर में खड़ा हुआ विवाद

Shivani Singh

Recent Posts

आखिर कौन थे वह इंजीनियर, जिनकी मौत से यूपी में मचा हड़कंप? CEO की गई कुर्सी

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा में इंजीनियर की मौत…

January 19, 2026

BJP President Election: नितिन नबीन निर्विरोध बीजेपी अध्यक्ष चुने गए; किसी और ने नहीं फाइल किया नॉमिनेशन

Nitin Nabin News: 36 में से 30 राज्यों में संगठनात्मक चुनाव होने के बाद, तय…

January 19, 2026

Nitin Nabin: कहां से शुरू हुआ नितिन नबीन का राजनीतिक सफर? राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने तक की राह की 10 खास बातें

Nitin Nabin: भारतीय जनता पार्टी (BJP) को छह साल बाद नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला…

January 19, 2026

दिव्य संकेत या बीमारी? मंदिर में कुत्ते का रहस्यमय चक्कर विवाद; आखिर क्या है इसके पीछे का सच?

Dog Circling Temple Miracles: इस घटना का एक वीडियो वायरल हो गया है, जिससे मंदिर…

January 19, 2026

Victorian Disease: क्या है विक्टोरियन बीमारी? यहां जानें इसकी पहचान, लक्षण, निदान और रोकथाम

Victorian Disease symptoms: इन रोगों का निदान डॉक्टर शारीरिक जाँच, रक्त परीक्षण, एक्स-रे, थूक परीक्षण…

January 19, 2026