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UP Board Intermediate Exam: यूपी बोर्ड परीक्षा में छात्र की अनोखी हरकत,“चल मेरी कॉपी गुरु के पास”–पढ़ें छात्र ने क्या-क्या लिखा

उत्तर प्रदेश बोर्ड कक्षा 12 की समाजशास्त्र परीक्षा में एक छात्र ने अपनी उत्तरपुस्तिका में 100 रुपये का नोट चिपकाकर और मजाकिया वाक्य लिखकर सबको हैरान कर दिया. छात्र ने बिना उत्तर लिखे खुद को 100 में से 100 नंबर दे डाले, साथ ही “बाबर के बाप शिवाजी महाराज”, “जय श्री राम” और “जय हनुमान” जैसी बातें भी लिखीं.

By: Ranjana Sharma | Published: February 22, 2026 12:56:29 PM IST



UP Board Intermediate Exam: उत्तर प्रदेश बोर्ड के तहत कक्षा 12 की समाजशास्त्र परीक्षा के दौरान एक छात्र की उत्तरपुस्तिका ने सबको हैरान कर दिया. छात्र ने केवल उत्तर पुस्तिका में अजीबोगरीब टिप्पणियां लिखीं बल्कि 100 रुपये का नोट भी चिपका दिया. ऐसा करना उसके विषय ज्ञान की कमी, कम तैयारी, मजाक या परीक्षक का ध्यान आकर्षित करने की प्रवृत्ति का नतीजा माना जा रहा है.

चल मेरी कॉपी गुरु के पास

वायरल वीडियो के अनुसार, छात्र ने उत्तर पुस्तिका के पहले पन्ने पर लिखा था, “चल मेरी कॉपी गुरु के पास, इच्छा होगी तो करेगा पास.” इसके साथ ही उसने 100 रुपये का नोट भी रख दिया. वीडियो में दिखाया गया है कि कॉपी में अन्य पन्नों पर “सॉरी, सर गलती से छूट गया”, “बाबर के बाप का नाम, छत्रपति शिवाजी महाराज”, “जय श्री राम” और “जय हनुमान” जैसी बातें भी लिखी गई थीं.

खुद ही दे दिए 100 में से 100 नंबर

हैरानी की बात यह है कि छात्र ने बिना उत्तर लिखे ही खुद को 100 में से 100 नंबर दे डाले और उन्हें घेरा भी लगाया. इसके अलावा, उत्तर पुस्तिका का बाकी हिस्सा लगभग खाली था.

सोशल मीडिया पर वायरल

यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो डालकर कैप्शन में लिखा गया कि यूपी में परीक्षा के दौरान युवाओं की मानसिकता में अकादमिक ज्ञान की बजाय ध्रुवीकृत विचार अधिक हावी हैं. वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों की प्रतिक्रिया मिश्रित है. कुछ इसे मजाक के रूप में देख रहे हैं, जबकि कई लोग इसे शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही मान रहे हैं.

यूजर्स की प्रतिक्रियाएं

कमेंट सेक्शन में यूजर्स ने लिखा कि बाबर और छत्रपति शिवाजी महाराज अलग-अलग शताब्दियों के थे और समाजशास्त्र की परीक्षा में उनकी चर्चा हास्यास्पद है. कई लोगों ने चिंता जताई कि परीक्षाएं सीखने के लिए होती हैं, न कि नारों या नोट चिपकाने के लिए. विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल छात्र की अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा सिस्टम पर सवाल उठाने वाला मामला है.

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