क्या माघ मेले में वापसी करेंगे अविमुक्तेश्वरानंद? पूर्णिमा स्नान से पहले शंकराचार्य ने दी बड़ी चेतावनी

Magh Mela: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के करीबी सूत्रों से बड़ी खबर सामने आ रही है. प्रशासन अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लिए पूर्णिमा स्नान की व्यवस्था पूरे सम्मान के साथ करने की कोशिश कर रहा है. कुछ वरिष्ठ अधिकारी मध्यस्थता में लगे हुए है.

Published by Mohammad Nematullah

Magh Mela: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के करीबी सूत्रों से बड़ी खबर सामने आ रही है. प्रशासन अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लिए पूर्णिमा स्नान की व्यवस्था पूरे सम्मान के साथ करने की कोशिश कर रहा है. कुछ वरिष्ठ अधिकारी मध्यस्थता में लगे हुए है. इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार को मेले से चले गए और काशी चले गए है. सूत्रों के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भारी मन से मेले से गए क्योंकि प्रशासनिक अधिकारियों ने माफी नहीं मांगी. हालांकि अधिकारियों ने मौनी अमावस्या विवाद पर खेद व्यक्त किया था, लेकिन जब तक अधिकारियों की माफी का संदेश उन तक पहुंचा, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके थे और मेले से जाने की घोषणा कर चुके थे.

मौनी अमावस्या स्नान के दौरान विवाद हुआ

वह इस बात से भी नाराज थे कि अधिकारियों ने कथित तौर पर हमला किए गए युवा शिष्यों के मामले में किसी भी गलती को स्वीकार नहीं किया है. 18 जनवरी को जब वह मौनी अमावस्या स्नान के लिए पालकी में संगम नोज जा रहे थे, तो पुलिस के साथ विवाद हो गया. पुलिस ने संगम नोज पर भीड़ का हवाला देते हुए पालकी रोक दी. जब विवाद बढ़ा, तो पुलिस ने कथित तौर पर शंकराचार्य के साथ आए शिष्यों के बाल पकड़े और उन पर हमला किया है. आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने खुद उन्हें पालकी के साथ सेक्टर 4 में त्रिवेणी मार्ग पर उनके कैंप के बाहर छोड़ दिया है. इसके बाद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 18 जनवरी से 28 जनवरी तक अपने कैंप के बाहर भूख हड़ताल पर रहे है. जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने भी उन्हें जवाब मांगने के लिए दो नोटिस जारी किए.

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वरिष्ठ अधिकारी मध्यस्थता कर रहे

इस बीच उन्हें सपा प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं का भी समर्थन मिला है. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने उनके समर्थन में अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर वरिष्ठ अधिकारी अब मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहे हैं, तो ये अधिकारी 11 दिनों तक क्या कर रहे थे जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती माघ मेले में भूख हड़ताल पर थे? 

उनकी केवल दो मांगें थी

पहली कि प्रशासन उनके लिए गंगा में सम्मानजनक स्नान की व्यवस्था करे. दूसरा उन्हें माघ मेले में चारों शंकराचार्यों के स्नान की रस्मों के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करना चाहिए. उन्हें युवा शिष्यों और छात्रों पर पुलिस की बर्बरता और हमले के लिए माफी भी मांगनी चाहिए.

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