Balrampur CMO transfer: सीएमओ पर लगे गंभीर आरोपों के बाद बड़ा एक्शन, बलरामपुर से हुआ तबादला

Balrampur CMO transfer: बलरामपुर नगर पालिका में CMO प्रणव राय पर अभद्र भाषा और पार्षदों को धमकाने के आरोपों के बीच राज्य शासन ने उनका तबादला कर दिया. वायरल कॉल रिकॉर्डिंग के बाद विवाद बढ़ गया था और भाजपा पार्षदों ने विरोध करते हुए कार्रवाई की मांग की थी. लगातार शिकायतों और बढ़ते तनाव को देखते हुए शासन ने हस्तक्षेप कर यह फैसला लिया.

Published by Ranjana Sharma
Balrampur CMO transfer : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर नगर पालिका में लंबे समय से चल रहा विवाद आखिरकार थमता नजर आ रहा है. मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) प्रणव राय पर लगे अभद्र व्यवहार और धमकी के गंभीर आरोपों के बीच राज्य शासन ने उनका तबादला कर दिया है. इस फैसले के बाद स्थानीय पार्षदों और जनप्रतिनिधियों ने राहत की सांस ली है.

अभद्र भाषा और धमकी के आरोपों से बढ़ा विवाद

बलरामपुर नगर पालिका में तैनात सीएमओ प्रणव राय पर आरोप था कि उन्होंने पार्षदों के साथ बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें धमकाया. यह मामला तब और ज्यादा गरमाया, जब एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. रिकॉर्डिंग के सामने आने के बाद नगर पालिका के भीतर का माहौल तनावपूर्ण हो गया और इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया.

पार्षदों ने खोला मोर्चा, की शिकायतें

मामले को लेकर भाजपा के कई पार्षद खुलकर सामने आए और उन्होंने सीएमओ के व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई. पार्षदों का कहना था कि उनका रवैया जनप्रतिनिधियों के प्रति अपमानजनक रहा है, जिससे विकास कार्य और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहे थे. इस मुद्दे को लेकर पार्षदों ने कई बार उच्च अधिकारियों और शासन स्तर पर शिकायतें भी दर्ज कराई थीं और कार्रवाई की मांग की थी.

विवाद बढ़ने पर शासन ने किया हस्तक्षेप

लगातार बढ़ते विवाद, पार्षदों की नाराजगी और प्रशासनिक असंतोष को देखते हुए आखिरकार राज्य शासन को हस्तक्षेप करना पड़ा. पूरे मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए शासन ने सीएमओ प्रणव राय का तबादला करने का फैसला लिया. इस निर्णय को प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है.

तबादले के बाद पार्षदों ने ली राहत की सांस

सीएमओ के स्थानांतरण के बाद नगर पालिका के पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने राहत महसूस की है. उन्होंने शासन के इस फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि अब नगर पालिका में कामकाज सुचारु रूप से चलेगा और प्रशासनिक माहौल बेहतर होगा. जनप्रतिनिधियों का मानना है कि इस फैसले से न केवल विवाद खत्म होगा, बल्कि विकास कार्यों में भी तेजी आएगी.

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