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Sankashti Chaturthi 2026: वैशाख संकष्टी चतुर्थी का कन्फ्यूजन खत्म, यहां जानें सही दिन और मुहूर्त

Sankashti Chaturthi 2026:  विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 का व्रत 5 अप्रैल (रविवार) को रखना शुभ है, क्योंकि इसी दिन चतुर्थी तिथि में चंद्र दर्शन संभव है. इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने और चंद्रमा को अर्घ्य देने से जीवन के संकट दूर होते हैं .

By: Ranjana Sharma | Published: April 5, 2026 2:23:32 PM IST



Sankashti Chaturthi 2026: वैशाख मास में आने वाली संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व निर्जला एकादशी और अक्षय तृतीयाकी तरह ही बेहद खास माना जाता है. साल 2026 में विकट संकष्टी चतुर्थी को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है कि व्रत 5 अप्रैल को रखा जाए या 6 अप्रैल को. ऐसे में पंचांग और चंद्रोदय के आधार पर सही तिथि जानना जरूरी है.

कब है सही व्रत की तारीख?

पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 5 अप्रैल 2026 को दोपहर 03:42 बजे से होगी और इसका समापन 6 अप्रैल 2026 को दोपहर 02:18 बजे पर होगा. संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूरा माना जाता है और चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल की रात को मिल रही है, इसलिए 5 अप्रैल 2026 (रविवार) को व्रत रखना श्रेष्ठ रहेगा.

चंद्रोदय और पूजा का शुभ समय इस दिन चंद्रोदय का समय रात 09:22 बजे रहेगा. गणेश जी की पूजा के लिए शाम का समय सबसे उत्तम माना जाता है. रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है.

इस बार क्यों है खास संयोग?

इस बार चतुर्थी पर चंद्रमा Scorpio राशि में गोचर करेंगे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वृश्चिक में चंद्रमा नीच का माना जाता है. ऐसे में भगवान गणेश की पूजा करने से मानसिक तनाव कम होता है.चंद्र दोष दूर होते हैं.मन में स्थिरता और शांति आती है.

व्रत विधि: ऐसे करें पूजा

  • सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें
  • दिनभर फलाहार करें
  • शाम को भगवान गणेश को पीले वस्त्र पहनाएं
  • मोदक या लड्डू का भोग लगाएं
  • दूर्वा (घास) अर्पित करें
  • रात में चंद्रमा को जल, दूध और अक्षत से अर्घ्य दें
  • अर्घ्य के बाद ही व्रत खोलें

क्या है ‘विकट’ संकष्टी चतुर्थी का महत्व?

वैशाख मास की इस चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर होते हैं.
  • खासतौर पर यह व्रत संतान सुख के लिए
  • घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए
  • मानसिक शांति पाने के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है.

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