बाकी सब पीले हो गए, लेकिन Apple का कवर क्यों नहीं? असली वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

अब सवाल उठता है कि वही धूप और हवा तो Apple के कवर पर भी पड़ती है, फिर भी वो वैसे ही चमकदार क्यों रहते हैं? इसका जवाब है- Premium Material और High-End Manufacturing Process.

Published by Renu chouhan

क्या आपने कभी गौर किया है कि आपके फोन का ट्रांसपेरेंट कवर कुछ ही दिनों में पीला पड़ जाता है? लेकिन जब बात आती है Apple के कवर की, तो वो महीनों तक नए जैसे रहते हैं. आखिर इसमें ऐसा कौन-सा जादू है? चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि Apple का कवर क्यों नहीं होता पीला और आम कवर क्यों अपना रंग बदल लेते हैं. सबसे पहले समझिए कि फोन कवर पीले पड़ते ही क्यों हैं. अक्सर सस्ते मोबाइल कवर TPU (Thermoplastic Polyurethane) मटेरियल से बने होते हैं. यह एक सस्ता प्लास्टिक होता है जो सूरज की UV किरणों, ऑक्सीजन, धूल-मिट्टी, और पसीने के तेल से रिएक्ट करता है. समय के साथ यह रिएक्शन कवर की सतह को ऑक्सिडाइज़ कर देता है, जिससे उसका रंग फीका और पीला पड़ने लगता है. यानी जितनी देर तक आपका कवर धूप, धूल या पसीने के संपर्क में रहेगा, उतनी जल्दी वो अपनी चमक खो देगा.

Apple के कवर क्यों नहीं पड़ते पीले?
अब सवाल उठता है कि वही धूप और हवा तो Apple के कवर पर भी पड़ती है, फिर भी वो वैसे ही चमकदार क्यों रहते हैं? इसका जवाब है- Premium Material और High-End Manufacturing Process.

प्रीमियम मटेरियल का इस्तेमाल
Apple और कुछ अन्य ब्रांड जैसे Spigen, RhinoShield अपने कवर में High-Quality Silicone और Polycarbonate Compounds का इस्तेमाल करते हैं. ये मटेरियल सस्ते प्लास्टिक की तरह UV लाइट से प्रभावित नहीं होते. इनकी बनावट ऐसी होती है कि ये न तो आसानी से ऑक्सिडाइज़ होते हैं और न ही धूल या नमी को जल्दी पकड़ते हैं. यानी कवर की सतह पर जमी गंदगी और तेल भी इसे नुकसान नहीं पहुंचा पाते.

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स्पेशल एंटी-येलोइंग कोटिंग
Apple के कवर में एक खास Anti-Yellowing Coating दी जाती है. यह कोटिंग UV Protection Layer की तरह काम करती है, जो सूरज की किरणों और नमी से होने वाली रासायनिक क्रियाओं को रोकती है. इस कोटिंग की वजह से कवर का रंग लंबे समय तक Transparent और Shiny बना रहता है. यही कारण है कि Apple या Spigen जैसे ब्रांड अपने कवर पर “Won’t Yellow Over Time” का दावा करते हैं.

एडवांस मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस
महंगे ब्रांड्स अपने कवर को बनाने में Heat, Pressure और Chemical Testing का इस्तेमाल करते हैं. इस प्रक्रिया से कवर की मजबूती बढ़ जाती है और उसमें मौजूद प्लास्टिक यौगिक (compounds) स्टेबल हो जाते हैं. इसलिए जब इन्हें रियल लाइफ में यूज़ किया जाता है — धूप, धूल या पसीने के बीच — तब भी ये जल्दी रंग नहीं बदलते. यानी Apple के कवर का जादू किसी “मैजिक” से नहीं, बल्कि साइंटिफिक डिजाइन और प्रीमियम टेक्नोलॉजी से है.

Renu chouhan
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