Home > खेल > ट्रेन में हजारों फैंस के बीच बैठे, फिर भी नहीं कर पाया कोई पहचान, वर्ल्ड कप जीतने के बाद शिवम दूबे ऐसे पहुंचे घर

ट्रेन में हजारों फैंस के बीच बैठे, फिर भी नहीं कर पाया कोई पहचान, वर्ल्ड कप जीतने के बाद शिवम दूबे ऐसे पहुंचे घर

Shivam Dube train journey: हाल ही में नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मैच खेला गया था जिसका खिताब भारत के नाम हुआ और उसके बाद सभी प्लेयर अपने घर को रवाना हो गए. एक प्लेयर ने अपने घर जाने के लिए ट्रेन का सहारा लिया. आइए जानते हैं सबकुछ-

By: sanskritij jaipuria | Published: March 11, 2026 12:56:45 PM IST



Shivam Dube train journey: लाखों लोगों से गूंजते नरेंद्र मोदी स्टेडियम में ‘दूबे, दूबे’ के जयकारों के कुछ ही घंटों बाद, टी20 वर्ल्ड कप उठाने वाले शिवम दूबे ने मुंबई लौटने के लिए ट्रेन का रास्ता चुना. भारतीय क्रिकेट का ये ‘फाइनल एक्शन हीरो’ अहमदाबाद-मुंबई सयाजी एक्सप्रेस की 3-तीसरी एसी कोच की ऊपरी बर्थ पर चादर ओढ़े चुपचाप बैठे थे.

रविवार की देर रात, जब उन्होंने भारतीय पारी के 20वें ओवर में तीन चौके और दो छक्के मारे, तो टीम को 250 का आंकड़ा पार करवा दिया. लेकिन सोमवार की सुबह सभी फ्लाइट्स भरी हुई थीं. ‘हमेशा जल्दी में रहने वाले’ दूबे ने पत्नी अंजुम और एक दोस्त के साथ ट्रेन पकड़ने का फैसला लिया. उन्हें पता था कि पहचान होने का खतरा है, लेकिन अपने चार साल के बेटे अयान और दो साल की बेटी महविष के पास होना जरूरी था. फ्लाइट नहीं मिली, इसलिए सुबह-सुबह अहमदाबाद से मुंबई ट्रेन लेने का फैसला किया. सड़क से भी जा सकते थे, लेकिन ट्रेन तेज थी, दूबे ने कहा.

पहचान छिपाने की योजना

यात्रा के दौरान पहचान छिपाने के लिए उन्होंने रणनीति बनाई. ‘मैं, मेरी पत्नी और एक दोस्त ने ट्रेन लेने का फैसला किया. 3rd AC की टिकटें उपलब्ध थीं, इसलिए हमने बुक कर ली. परिवार और दोस्त परेशान थे, स्टेशन या ट्रेन में कोई मुझे पहचान गया तो?

इस छिपी हुई यात्रा के लिए सही पहनावा भी जरूरी था. ‘मैंने कैप, मास्क और फुल-स्लीव टी-शर्ट पहनी. ट्रेन सुबह 5:10 बजे थी, इसलिए उम्मीद थी कि प्लेटफार्म पर ज्यादा लोग नहीं होंगे.’

 भीड़ और चतुराई

लेकिन जैसे ही वे पहुंचे, उन्हें पता चला कि फैंस अभी भी भारत के जश्न में रंगे हुए हैं. योजना में थोड़ी बदलाव करनी पड़ी. ‘मैंने पत्नी से कहा कि ट्रेन के पांच मिनट पहले तक कार में इंतजार करूंगा, फिर दौड़कर ट्रेन में चढ़ जाऊंगा.’

कोच में चढ़ते ही टिकट चेक करने वाला आया. ‘शिवम दूबे? कौन है, क्रिकेटर?’ अंजुम ने तुरंत जवाब दिया, ‘नहीं, नहीं.. वो कहां से आएगा?’ और टिकट चेकर आगे बढ़ गया.

 टूर्नामेंट की शानदार यात्रा

ये टूर्नामेंट दूबे के लिए योजनाबद्ध तरीके से चला. कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने उनकी भूमिका साफ की थी. आखिरी ओवरों में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने कुल 235 रन बनाए, औसत 39 और स्ट्राइक रेट 169 के साथ. फाइनल में 8 गेंदों में 26 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई. टूर्नामेंट में 17 छक्के और 15 चौके भी उनके नाम रहे. मुझे कहा गया था कि जब मैं बल्लेबाजी करूं तो रन रेट कभी गिरने न दूं और गेंदबाजी में रन कम पड़ें.’

 

Tags:
Advertisement