Rishabh pant vs Dhruv jurel vs Ishan kishan: न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान शनिवार को कर दिया गया है, जिसमें कई अहम फैसले देखने को मिले. श्रेयस अय्यर और मोहम्मद सिराज की टीम में वापसी हुई है, जबकि दक्षिण अफ्रीका सीरीज में शानदार शतक लगाने के बावजूद ऋतुराज गायकवाड़ को चयनकर्ताओं ने नजरअंदाज कर दिया.
टीम चयन से पहले सबसे ज्यादा चर्चा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को लेकर रही, जो खराब फॉर्म के कारण टीम से बाहर होने की कगार पर माने जा रहे थे.
सेलेक्टर्स ने पंत पर दिखाया भरोसा
ऋषभ पंत को घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर रहे ईशान किशन और ध्रुव जुरेल से कड़ी चुनौती मिल रही थी. इसके बावजूद चयनकर्ताओं ने पंत पर भरोसा जताते हुए उन्हें वनडे टीम में दूसरे विकेटकीपर के रूप में बरकरार रखा. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछली वनडे सीरीज में पंत को एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला था. फिलहाल वह विजय हजारे ट्रॉफी में दिल्ली की कप्तानी कर रहे हैं. इस टूर्नामेंट में पंत ने पांच मैचों में 188 रन बनाए हैं, जिसमें दो अर्धशतक शामिल हैं. हालांकि उनका प्रदर्शन निरंतर नहीं रहा, फिर भी चयनकर्ताओं ने उनके अनुभव और बड़े मैचों में क्षमता को प्राथमिकता दी.
ध्रुव जुरेल – घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन, फिर भी नहीं मिला मौका
दूसरी ओर, ध्रुव जुरेल ने घरेलू क्रिकेट में अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा है. विजय हजारे ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश की ओर से खेलते हुए जुरेल ने बड़ौदा के खिलाफ ऐतिहासिक पारी खेली और 101 गेंदों में नाबाद 160 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 15 चौके और 8 छक्के लगाए. जुरेल ने इस सीजन में लगातार तीन मैचों में 50 से ज्यादा रन बनाकर अपनी दावेदारी मजबूत की है. हैदराबाद के खिलाफ 80, चंडीगढ़ के खिलाफ 67 और बड़ौदा के खिलाफ 160* रन की पारियां उनकी शानदार फॉर्म को दर्शाती हैं.
ईशान किशन – विजय हजारे ट्रॉफी में जीती, पर टीम में नहीं मिली जगह
ईशान किशन को वनडे टीम में जगह नहीं मिली, लेकिन उनके घरेलू प्रदर्शन का असर टी20 टीम चयन में दिखा है. वह टी20 टीम में चुने गए हैं और आगामी टी20 विश्व कप की योजनाओं का हिस्सा भी हैं. विजय हजारे ट्रॉफी में झारखंड की कप्तानी कर रहे किशन ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए कर्नाटक के खिलाफ 39 गेंदों में 125 रन की तूफानी पारी खेली. कुल मिलाकर, चयनकर्ताओं ने अनुभव और भविष्य की संभावनाओं के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है, हालांकि कुछ फैसले बहस का विषय बने हुए हैं.