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3I/ATLAS से पहले और कौन से धूमकेतु आए थे, क्या है उनका नाम?

3I/ATLAS हमारे सौरमंडल से गुजरने वाला तीसरा अंतरतारकीय धूमकेतु है. इससे पहले दो और धूमकेतु आए थे. क्या आप जानते हैं कि वे कौन से हैं, अगर नहीं तो आइए जानते हैं-

Published by sanskritij jaipuria

सोशल मीडिया पर इन दिनों 3I/ATLAS नाम के एक रहस्यमयी धूमकेतु की खूब चर्चा हो रही है. लोग इसे लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं. इस धूमकेतु को सबसे पहले 1 जुलाई 2025 को चिली में स्थित नासा के एटलस टेलीस्कोप ने खोजा था. इसकी कक्षा हाइपरबोलिक है, यानी ये सूर्य की परिक्रमा नहीं करेगा, बल्कि एक बार गुजरकर हमेशा के लिए अंतरिक्ष में चला जाएगा.

सूर्य के सबसे करीब आया 3I/ATLAS

30 अक्तूबर 2025 को ये धूमकेतु सूर्य के सबसे पास आया. जब ये सूर्य के करीब पहुंचा, तो उसकी बर्फीली सतह पिघलने लगी, जिससे इसके चारों ओर धुंधली चमकदार परत बन गई और पीछे एक लंबी पूंछ दिखाई देने लगी. यही दृश्य इसे एक सामान्य धूमकेतु से अलग बनाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से बंधा नहीं है, इसलिए ये हमारे सौरमंडल का नहीं, बल्कि किसी दूसरे तारामंडल से आया मेहमान है.

हमारे सौरमंडल से गुजरने वाला तीसरा अंतरतारकीय पिंड

3I/ATLAS अब तक का तीसरा ऐसा अंतरतारकीय पिंड (Interstellar Object) है, जो हमारे सौरमंडल से गुजरा है. इससे पहले 2017 में Oumuamua और 2019 में 2I/Borisov जैसे दो अन्य पिंड देखे जा चुके हैं.

 Oumuamua सबसे पहला ज्ञात अंतरतारकीय पिंड था. इसकी आकृति लंबी और असामान्य थी, जिससे वैज्ञानिकों में जिज्ञासा बढ़ी.
 2I/Borisov एक वास्तविक धूमकेतु जैसा दिखा, जिसमें गैस और धूल की पूंछ थी.

अब 3I/ATLAS इन दोनों के बाद तीसरा आगंतुक है, जो लगभग 60 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से यात्रा कर रहा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये 19 दिसंबर 2025 को पृथ्वी के सबसे करीब पहुंचेगा.

क्या इस धूमकेतु से टकराने का खतरा है?

नासा ने साफ किया है कि इस धूमकेतु से पृथ्वी को किसी भी तरह का खतरा नहीं है. ये सिर्फ सूर्य और पृथ्वी के पास से होकर गुजर जाएगा. हालांकि, वैज्ञानिक इस पर लगातार नजर रखे हुए हैं ताकि इसके बारे में और जानकारी जुटाई जा सके.

3I/ATLAS वैज्ञानिकों के लिए बहुत दिलचस्प है क्योंकि इसमें कुछ अनोखे गुण पाए गए हैं. इसकी पूंछ में कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता है और इसमें एक ऐंटी टेल (विपरीत दिशा में दिखाई देने वाली पूंछ) भी देखी गई है. नासा का कहना है कि ऐसे अंतरतारकीय पिंडों का अध्ययन करने से हमें ये समझने में मदद मिलती है कि अन्य तारामंडलों में ग्रह और धूमकेतु कैसे बनते हैं.

sanskritij jaipuria
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