Real New Year 2026: यह तो सभी जानते हैं कि 1 जनवरी का हम नए साल का स्वागत करते हैं, धूमधाम के साथ जश्न करते हैं. लेकिन, क्या आप एक बात जानते हैं खगोलविदों और गणितज्ञों (Astronomers and Mathematicians) के मुताबिक, ब्रह्मांडीय ऊर्जा और पृथ्वी की स्थिति के अनुसार 3 जनवरी कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण और अधिक माना जाता है. इसके पीछे कोई किसी भी तरह का अधंविश्वास नहीं, बल्कि बड़ा ही अनोखा खगोल विज्ञान मौजूद है.
आखिर क्या है ब्रह्मांडीय सच?
दरअसल, पृथ्वी सूर्य के चारों तरफ एक पूर्ण वृत्त (Circle) में नहीं, बल्कि एक अंडाकार (Ellipse) कक्षा में लगातार घूमती रहती है. और 3 जनवरी एक ऐसा समय होता है जब धरती सूर्य के सबसे करीब होती है. हालाँकि, गणितीय रूप से, इस दिन पृथ्वी और सूर्य की दूरी सबसे कम यानी कि, लगभग 147 मिलियन किलोमीटर) होती है.
क्या कहता है ऊर्जा का नया चक्र?
तो वहीं, दूसरी तरफ कुछ विचारकों का यह भी मानना है कि इस दिन धरती सूर्य के सबसे निकट होती है, इसलिए ब्रह्मांडीय ऊर्जा का नया प्रवाह इसी दिन से शुरू होना चाहिए, न कि मनमाने ढंग से चुनी गई 1 जनवरी से.
ग्रेगोरियन कैलेंडर बनाम खगोलीय गणना
तो वहीं, दूसरी तरफ 1 जनवरी को नया साल मनाना पूरी तरह से ग्रेगोरियन कैलेंडर यानी कि (रोमन परंपरा) पर आधारित होता है. इसका खगोलीय पिंडों (Celestial Bodies) की गति से किसी भी प्रकार का कोई सीधा संबंध नहीं है.
क्या यह “असली” नया साल है?
लेकिन अब सबसे अहम सवाल यह उठता है कि आखिर नया साल कब मनाया जाता है? गणितज्ञों और खगोलविदों का एक वर्ग यह बताता है कि अगर हम समय की गणना प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर करें, तो नया साल किसी खगोलीय घटना (जैसे संक्रांति या पेरिहेलियन) से शुरू होना चाहिए. इतना ही नहीं, 2026 में भी, पृथ्वी अपनी कक्षा के उस बिंदु पर 3 जनवरी के आसपास ही होगी जहां वह सूर्य के सबसे करीब है. इस नजरिए से, इसे “प्राकृतिक नया साल” या “ब्रह्मांडीय चक्र की शुरुआत” कहा जाता है.