Mahashivratri 2026 Katha: दिक पंचांग के मुताबिक, आज 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा है. यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. इस शुभ अवसर पर माता पार्वती और भगवान शिव की अराधना की जाती है. साथ ही लोग मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए भी व्रत रखते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि को मौके पर शिव पूजा करने से जीवन में खुशियों का आगमन होता है. साथी ही महादेव की कृपा भी प्राप्त होती है. माना जाता है कि इस व्रत कथा का पाठ करने से साधक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है.
महाशिवरात्रि की कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक, चित्रभानु नाम का शिकारी था. एक बार उसके जीवन में ऐसा समय आया जब उसपर कर्ज का बोझ बढ़ गया. कर्ज न चुकाने के कारण साहुकार ने उसे शिवरात्रि के दिन बंदी बना लिया. उस दौरान शिकारी ने भगवान शिव का ध्यान किया. वह जंगल में शिकार के लिए निकला लेकिन उसे कुछ नहीं मिला. फिर वह एक बेलपत्र के पेड़ पर चढ़ गया. शिवलिंग सूखे पत्तों से ढका हुआ था. इसी कारण शिकारी वह नजर नहीं आ रहा था.
पेड़ पर बैठे हुए उसे काफी समय हो गया और नींद आने लगी. ऐसे में खुद को जगाए रखने के लिए शिकारी ने बेल के पत्ते तोड़े और नीचे गिराने लगे. वह बेल के पत्ते सीधे शिवलिंग पर अर्पित होते चले गए. उसकी महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर की पूजा हो गई. कुछ समय बाद तालाब पर एक गर्भिणी हिरनी पानी पीने आई. उसे देख शिकारी ने तुरंत धनुष-बाण से उसपर निशाना साधा. ऐसे में हिरणी ने शिकारी से विनती की हे व्याध! मैं गर्भिणी हूं और जल्द प्रसव करने वाली हूं. शिकारी को हिरणी पर दया आ गई और उससे इस दौरान अनजाने में फिर से बेलपत्र गिर गए और दूसरे प्रहर की पूजा भी पूरी हो गई.
कुछ समय के बाद एक और हिरणी आई और फिर शिकारी ने उस पर निशाना साध लिया. हिरणी ने कहा कि मैं जंगल में अपने पति को खोज रही हूं. एक बार मुझे अपने पति से मिलने दो, उनसे मिलने के बाद मैं वापस तुम्हारे पास आ जाऊंगी. यह सुन शिकारी ने हिरणी को जाने दिया. इस दौरान शिकारी ने एक बार फिर से अनजाने में बेलपत्र गिरा दिए और तीसरे प्रहर की पूजा भी पूरी हो गई.
फिर सुबह के दौरान एक हिरण परिवार साथ में शिकारी के पास आ गया. हिरण के परिवार को देख शिकारी खुश हो गया. ऐसे में उसने तुरंत बाण उठाया, तो हिरण ने कहा कि हे शिकारी अगर तुमने मुझसे पहले आने वाली हिरनियों को मार दिया है, तो आप मुझे भी मार डालो ताकि मेरा दुख खत्म हो. या नहीं मेरा है तो मुझे भी कुछ पल का जीवनदान दो. यह सुन शिकारी ने हिरण के परिवार को जीवनदान दे दिया. शिवरात्रि व्रत एवं पूजा करने से चित्रभानु को मोक्ष मिला और साथ ही शिवलोक की प्राप्ति भी हुई.
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